महराजगंज। सीएमओ डॉ. श्रीकांत शुक्ला ने रविवार को दो सीएचसी और एक पीएचसी का निरीक्षण किया। इस दौरान एक डाॅक्टर, एक लैब टेक्नीशियन, दो स्वीपर, एक आयुष्मान मित्र, एक वार्ड बॉय और एक स्टाफ नर्स अनुपस्थित मिले। उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए डाॅक्टर समेत सभी कर्मियों का एक दिन का वेतन रोक दिया।
वहीं, दो स्टाफ नर्स की ओर से संस्थागत प्रसव के बाद मंत्रा एप पोर्टल पर अपलोड नहीं करने पर वेतन बाधित कर स्पष्टीकरण तलब किया है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीकांत शुक्ला ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चौक का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पता चला कि 28 जून को डॉ. प्रमोद कुमार अनुपस्थित थे। वहीं, 29 जून को लैब टेक्नीशियन राहुल कुमार कन्नौजिया, स्वीपर अवधराज और अंगीरा,व आयुष्मान मित्र राजन वर्मा ड्यूटी से गायब मिले।
उन्होंने नाराजगी जाहिर की और सभी अनुपस्थित डाॅक्टर और कर्मियों का एक दिन का वेतन रोक दिया। निरीक्षण के समय अस्पताल में दो मरीज भर्ती मिले। एक प्रसव और एक अन्य बीमारी से ग्रसित था। इसके अलावा प्रसव रूम और वार्ड का निरीक्षण करते समय वहां साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब पाई गई। सीएमओ ने नाराजगी जताते हुए तत्काल सफाई कराने के निर्देश दिए।
साथ ही ओआरएस कॉर्नर न होने पर उन्होंने मौके पर ही इसे बनवाया। ओआरएस और जिंक की गोली की उपलब्धता की जांच की। इसके अलावा प्रसव स्टाफ की ओर से 7 प्रसव को मंत्रा ऐप पर अपलोड न करने पर सीएमओ ने नाराजगी जताई और संबंधित स्टाफ नर्स किरण व चंद्रकला से स्पष्टीकरण मांगा। इसके बाद सीएमओ ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चौक का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान सभी चिकित्सक और स्टाफ उपस्थित मिले, लेकिन स्टाफ नर्स ममता अनुपस्थित रहीं। इस दौरान उन्होंने कड़ी चेतावनी दी। वहीं सीएमओ ने सीएचसी मिठौरा का निरीक्षण किया। इमरजेंसी वार्ड में एक मरीज भर्ती मिला, लेकिन वार्ड बॉय राजेश गुप्ता ड्यूटी से अनुपस्थित थे, जिस कारण उनका दो दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए।
वहीं स्टाफ नर्स की ओर से दो प्रसव को मंत्रा ऐप पर अपलोड नहीं किया गया था। वहीं मरीजों को 48 घंटे तक अस्पताल में नहीं रोका जा रहा था। इस दौरान उन्होंने कड़ी नाराजगी जाहिर की और स्टाफ नर्स सीमा और सविता से स्पष्टीकरण तलब किया और उनका वेतन भी बाधित कर दिया। इसके अलावा जून माह में एनबीएसयू में कोई भी शिशु भर्ती नहीं किया गया। सीएमओ ने नाराजगी व्यक्त की और जरूरी मामलों में शिशुओं को भर्ती करने के निर्देश दिए।