तिलहन की फसल पर मंडराने लगा छाछया रोग का प्रकोप
पछेती फसलों पर इस रोग का पड़ रहा ज्यादा असर
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। रबी की फसलों में गेहूं के साथ तिलहन (सरसों) की फसल भी प्रमुख मानी जाती है। लेकिन इन दिनों मौसम में लगातार उतार चढ़ाव के चलते पछेती तिलहन की फसल पर छाछया रोग का प्रकोप मंडराने लगा है। वहीं कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में उतार चढ़ाव के कारण यह रोग लग रहा है। इससे किसानों को 15 से 20 प्रतिशत पैदावार का नुकसान हो सकता है। छाछया रोग कवक जनित रोग है।
क्षेत्र के मिश्रवलिया निवासी इजहार अली सिद्दकी ने बताया कि दो एकड़ सरसों की फसल की बुवाई की थी, फूल आते ही पत्तियां सफेद रंग की होने लगी हैं। अब वह तेजी से पीली होकर झड़ रही हैं। इससे पौधों में फली बनने में मुश्किल हो रहा है। चिंता सता रही है कि अब पैदावार कम होगी। जयश्री निवासी त्रिभुवन ने कहा कि चार एकड़ सरसों की फसल बुआई की थी। अब छाछया रोग लग गया। पत्तियां सफेद होने लगी हैं। पैदावार कम होने की आशंका है। कृषि विज्ञान केंद्र बसूली के कृषि वैज्ञानिक डॉ. वी. चंद्रन ने बताया कि इस रोग में सरसों के पौधे पर लगी पत्तियों पर शुरुआत में सफेद रंग की परत दिखाई देती है। धीरे-धीरे यह रोग संपूर्ण पौधे पर फैल जाता है। बाद में पत्तियों का रंग पीला पड़ जाता है। उसके बाद पत्तियां झड़ने लगती हैं। इससे सरसों की पैदावार में 15 से 20 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान होता है। किसान सरसों की खेती में सावधानी बरतें। सरसों की फसल में सिंचाई करने के बाद इन दिनों रुक-रुक कर हो रही बारिश से इस रोग की समस्या आ रही है। रोग का असर दिखते ही किसान कीटनाशक का स्प्रे करें ताकि रोग पर लगाम लग सके।
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छाछया या चूर्णिल आसिता
यह रोग एरीसीफी पोलीगोनी नामक कवक से होता हैं। इस रोग की प्रारंभिक अवस्था में पौधों की पत्तियों व टहनियों पर सफेद चूर्ण नजर आता हैं। धीरे-धीरे सफेद चूर्ण पूरे पौधे पर ही फैल जाता है, जिससे पौधे की वृद्धि रुक जाती है। रोगी फसल में बीज बनते ही नहीं बनते हैं तो कम व हल्के बीज बनते हैं।