मिठौरा। क्षेत्र के छह गांव की महिलाएं माइक्रो फाइनेंस कंपनी के कर्ज से दबी हैं। काम-धंधा बंद होने से महिलाएं किस्त जमा नहीं कर पा रही हैं। इससे एजेंट घर आकर खरीखोटी सुनाते हैं।
शहर से लेकर गांव तक माइक्रो फाइनेंस कंपनियां काम कर रही हैं, जो महिलाओं को 20 हजार से लेकर दो लाख रुपये तक का ऋण देती हैं। वहीं, किस्तों में ऋण की राशि वापस लेते हैं। फाइनेंस कंपनियों से ऋण लेने वाले महिलाओं को किस्त चुकाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन कंपनी वाले किस्त भरने के लिए दबाव डाल रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि समूह की अधिकतर महिलाएं इन दिनों किस्त कि राशि देने में सक्षम नहीं हैं।
ग्राम सभा पड़री कला निवासी मीरा देवी ने कहा कि तीन-चार माइक्रो फाइनेंस कंपनी से दो लाख रुपये कर्ज ली हूं। काम-धंधा बंद होने से आर्थिक हालत इन दिनों खराब है। इधर, माइक्रो फाइनेंस कंपनी वाले किस्त भरने के लिए दबाव डाल रहे हैं। काम शुरू होगा तब तो किस्त भर सकेंगे।
ग्राम सभा टीकर परसौनी की गायत्री देवी और गुड़िया का कहना है कि समूह की सभी महिलाएं फिलहाल ऐसी स्थिति में किस्त भरने में सक्षम नहीं है। माइक्रो फाइनेंस कंपनी के एजेंट से कुछ दिनों की मोहलत मांगी, लेकिन वे किस्त भरने के अलावा कोई बात नहीं कर रहे। अमरावती देवी का कहना है पति रोजी रोटी के सिलसिले में गुजरात में रहते हैं।
कंपनी में काम नहीं चलने के कारण एक महीने से बैठे हैं। पैसे नहीं आने से समय से किस्त जमा नहीं कर पा रही हूं। कंपनी से एक लाख रुपये का कर्ज लेकर कर्ज के दलदल में फंसती जा रही हूं। कर्ज का भुगतान करने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
पैसे न देने पर कंपनी के एजेंसी गाली गलौज करते हैं। पड़री कला निवासी आयशा का कहना है दिहाड़ी मजदूरी कर किस्त समय से जमा कर रही थी। कुछ दिनों से बीमार चल रही हूं। इसके चलते किस्त नहीं जमा कर पा रही हूं। कंपनी के एजेंट प्रताड़ित करते हैं।ह