कोयले की आंच से लोग भगा रहे सर्दी, बढ़ी खपत
अंगीठी में जलाने के लिए 16 रुपये किलो कोयला
महराजगंज। बढ़ती सर्दी भगाने के लिए आंच का इंतजाम करने में लोग जुटे हैं। लोगों को लकड़ी का आंच व धुंआ नहीं भा रहा। वह अंगीठी में जलाने के लिए कोयले की खरीद कर रहे हैं। मुख्यालय पर मऊपाकड़ व शिकारपुर में पक्का कोयला (धुंआ रहित) बिक रहा। इसकी बिक्री दिसम्बर के दूसरे पखवाड़े में जबरदस्त उछाल दिख रहा है।
शिकारपुर में कोयला विक्रेता जनकराज ने बताया कि इन दिनों प्रतिदिन लगभग एक क्विंटल कोयला लोग अंगीठी में जलाने के लिए खरीद रहे। इसकी बिक्री 16 रुपये किलो की दर से हो रही है। वही इमली का कोयला महंगा है और 40 रुपये किलो के रेट से बिक रहा लेकिन यह कम बिक रहा है। पक्का कोयला ही लोग अधिक खरीद रहे हैं। बढ़ती ठंड सिर्फ खानपान तक सीमित नहीं है बल्कि रोजमर्रा की जरूरतें भी बदली हैं। सर्द हवाओं और गिरते तापमान से राहत के लिए अंगीठी में लकड़ी की जगह कोयला जलाना मुफीद समझ रहे क्योंकि यह लकड़ी की तरह धुंआ नहीं फैलाता।
कारोबारी नगेंद्र ने बताया कि कोयले की सर्वाधिक खपत होटल व चाय की दुकानों पर भट्ठी जलाने के लिए होती है। लेकिन इसमें कच्चा कोयला प्रयुक्त होता है जो 12 रुपये किलो बिक रहा। वहीं अंगीठी में जलाने के लिए पक्का पत्थर कोयला व इमली का कोयला लोग खरीद रहे। इमली कोयला महंगा है जिसकी बिक्री 40 रुपये किलो हो रही। इन दिनों यह प्रतिदिन 20 से 25 किलो तक बिक रहा। वहीं सर्वाधिक डिमांड पत्थर वाले कोयले की है जो 16 रुपये किलो बिक रहा। इमली कोयले की तरह पक्के कोयले की आंच देर तक तो नहीं टिकती, लेकिन धुंआ रहित होने के कारण इसकी बिक्री अधिक है। बताया कि प्रतिदिन एक क्विंटल से अधिक कोयले की खपत सिर्फ अंगीठी में जलाने के लिए लोग कर रहे। पहले पक्का कोयला नाममात्र बिकता था, लेकिन सर्दी में बढ़ोतरी के कारण बिक्री बढ़ी है।
ठंड से ठिठुर रहे लोग, नही जले सार्वजनिक अलाव
ठूठीबारी। कस्बे में कोहरे के साथ मौसम में गलन और ठिठुरन बढ़ गई है, पर इससे निपटने के इंतजाम नाकाफी हैं। इस कारण लोग बस स्टॉप और चौराहों पर ठिठुरने को विवश हैं। कुछ स्थानों पर लोग आपसी सहयोग से अलाव जलाकर ठंठ से निजात पाने का प्रयास कर रहे हैं, प्रशासन की ओर से अलाव की व्यवस्था नहीं होने से लोग परेशान है। राधेश्याम गुप्ता, विजय साहनी, ओंकार वर्मा, हृदेश त्रिपाठी, नीरज सोेनी, राजेंद्र भारती आदि का कहना है कि ठंड के चलते शाम होते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जा रहा है। आरोप लगाया कि कस्बा स्थित चौराहों, बस स्टैंड, अस्पताल, बैंक, रैन बसेरा, पंचायत भवन समेत अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अभी तक अलाव जलाने का कोई इंतजाम नहीं है। संवाद