महराजगंज। कपड़े की तस्करी करने वालों ने बचाव का नया तरीका ढूंढ़ निकाला है। कानपुर, दिल्ली, सूरत, लुधियाना से कपड़ों की खेप बॉर्डर तक आसानी से पहुंच रही है। तस्करों के नेटवर्क में गड़बड़ी होने पर पोल खुल जाती है तो सूचना पुलिस-प्रशासन तक पहुंचती है। यही वजह है कि अक्सर बरामदगी होती रहती है। खास बात यह है कि पकड़ जाने पर सामान की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता है और तस्कर आसानी से बच जाते हैं।
सूत्रों की मानें तो भारत-नेपाल सीमा पर होली पर्व के कारण इस समय जमकर कपड़ों की तस्करी हो रही है। तस्कर करोड़ों के कपड़े नेपाल भेज रहे हैं। नेपाल में इन दिनों भारतीय कपड़ों की मांग अधिक है, जिसका फायदा धंधेबाज उठा रहे हैं।
एक अनुमान के मुताबिक करीब करोड़ों का धंधा होगा। दिल्ली, सूरत, लुधियाना से कपड़ों का खेप सीमावर्ती क्षेत्र में पहुंच रहा है। बसों में ही छोटे-छोटे बंडल आसानी से मंगाकर नेपाल भेज दिए जाते हैं। सीमावर्ती क्षेत्र में कई अवैध कार्गो सेवा के नाम पर गोदाम बनाए गए हैं। जहां प्रतिदिन कपड़े की गांठ पहुंच रही है। पकड़ में आने के बाद सामान किसका है, यह पता करने में पुलिस नाकाम है।
सूत्रों की मानें तो दूसरे राज्यों से जीएसटी चोरी कर कपड़ों के स्टॉक को सीमावर्ती क्षेत्र में इकट्ठा कर नेपाल भेजा जा रहा है। बीते दिनों कपड़े की बरामदगी के बाद अब जीएसटी विभाग भी ऐसे कई बड़े व्यापारियों को चिह्नित करना शुरू कर दिए हैं जो इस तरह के धंधे में संलिप्त हैं।
दिल्ली से रेडीमेड कपड़े और सूरत की साड़ियां पगडंडियों के रास्ते नेपाल पहुंच रही हैं। नेपाल भैरहवा के कपड़ा कारोबारी देवेंद्र ने बताया कि सोनौली से तस्करी का कपड़ा बड़े पैमाने पर नेपाल आ रहा है। इसके कारण एक नंबर से कारोबार करने वाले भी बदनाम हो रहे हैं। बताया कि त्योहारों में भारतीय कपड़ों की मांग बढ़ जाती है। खासकर साड़ी और लेडीज सूट की मांग ज्यादा रहती है। होली में तो टी-शर्ट से लेकर अन्य कपड़े मंगाए जा रहे हैं।
बीते सप्ताह कस्टम और पुलिस विभाग ने सोनौली के ही अवैध गोदाम से कपड़े बरामद किए थे। इसके बाद पिलर संख्या 519 के निकट रेडीमेड कपड़ों की बरामदगी तस्करों के कारनामों को बयां कर रही है। रविवार को नौतनवा में सुरक्षा एजेंसियों ने बड़े पैमाने पर कपड़ा बरामद किया। जांच एजेंसियां धंधेबाज तक पहुंचाने के लिए कुंडली खंगालने में लगी हैं।