महराजगंज। मोटा मुनाफे के चक्कर में टूथपेस्ट के साथ फेस क्रीम की तस्करी तेज हो गई है। बीते दिनों सुरक्षा एजेंसियों ने भारी मात्रा में कॉस्मेटिक बरामद की थी। टैक्स चोरी के साथ रेट में अंतर होने के कारण इसकी मांग भारतीय क्षेत्रों में अधिक रहती है। नेपाल निर्मित टूथपेस्ट और फेस क्रीम का धंधा हर माह करीब एक करोड़ का हो रहा है। सीमावर्ती बाजारों के अलावा बड़े महानगरों तक धंधेबाज इसकी आपूर्ति कर रहे हैं।
करीब पांच दिन पहले नेपाल निर्मित पेस्ट और क्रीम सुरक्षा कर्मियों ने कोल्हुई व खनुआ क्षेत्र से बरामद किया था। सूत्र बता रहे हैं कि सीमावर्ती बाजार के साथ ही गोरखपुर और बस्ती मंडल तक इसकी आपूर्ति की जा रही है। सीमावर्ती नगर नौतनवा कोल्हुई, निचलौल, ठूठीबारी और सिसवा बाजार इन दिनों तस्करी के सामानों का हब बन चुके हैं।
नेपाल से सोनौली सहित पगडंडियों के रास्ते रोजाना करोड़ों रुपये के कास्मेटिक उत्पाद तस्करी कर गोरखपुर बस्ती सहित देश के अन्य इलाकों में खपाए जा रहे हैं। इनमें टूथपेस्ट से लेकर शैंपू, पाउडर, सौंदर्य प्रसाधन के तमाम ब्रांड के क्रीम आदि शामिल हैं। हैरानी वाली बात तो यह है कि इन सामानों में नकली से लेकर असली भी शामिल हैं, लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि इन सामानों को नेपाल के रेट पर खरीदकर यहां भारतीय दाम में बेचा जा रहा है। रोजाना इस तस्करी के कारोबार से यहां के व्यापारी जहां मालामाल हो रहे हैं, वहीं ब्रांडेड कंपनियों से लेकर सरकार को रोजाना लाखों के राजस्व का नुकसान पहुंच रहा है। विभिन्न इलाकों में होलसेलर तस्करी के इन सामानों को खरीदकर गांव-देहात के ग्राहकों में खपा रहे हैं।
बीते दिनों सुरक्षा कर्मियों की चौकसी के कारण बरामदगी हुई थी। क्षेत्र में निगरानी तेज कर दी गई है। कहीं भी सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
-आतिश कुमार सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक
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दोगुने लाभ को लेकर होती है तस्करी
भारतीय की जगह नेपाली मूल्य अंकित अधिकांश नेपाल इन नेपाल निर्मित सामान असली और ब्रांडेड ही है। इसपर लगातार कस्टम विभाग से लेकर एसएसबी और अन्य एजेंसियां कार्रवाई भी कर रही हैं। इस पर अंकुश लगने की बजाए तस्करी का यह धंधा लगातार बढ़ता जा रहा है। वजह यह है कि जिस टूथ पेस्ट की कीमत भारत में 40 रुपये है वही नेपाल में नेपाली 40 रुपये है। मुद्रा परिवर्तन के कारण एक पेस्ट में 15 रुपये की बचत हो रही है। अन्य सामान होलसेल में लेने में इसकी कीमत नेपाली 30 रुपये की हो जाती है। जिसकी भारतीय मुद्रा में 19.75 रुपये होता है। 40 रुपये एमआरपी होने के कारण बड़े ही आसानी से बाजारों में खप जाता है। बहुत ही ध्यान देने पर पता चलता है कि उक्त समान मेड इन नेपाल है।
पहचान पाना बेहद मुश्किल
नेपाल निर्मित सामानों को भारतीय बाजार में आसानी से खपाने की एक सबसे बड़ी खास वजह यह भी है कि इनकी पहचान करना बेहद मुश्किल है। क्योंकि यह सामान देखने में बिलकुल उसी तरह हैं, जैसा कि भारत में है। फर्क सिर्फ इतना है कि इनके सामानों की पैकिंग के पीछे काफी ध्यान से देखने पर पता चलेगा कि यह मेड इन नेपाल के हैं। हालांकि, तमाम ऐसी ब्रांडेड कंपनियां हैं जिन्होंने नेपाल में अपनी फैक्ट्री डाल रखी है। चूंकि नेपाल में इसकी एमआरपी बेहद कम है और भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत और भी अधिक कम हो जाती है, इसका फायदा उठाते हुए तस्कर प्रतिदिन करोड़ों का माल बार्डर से आसानी से पार करा रहे हैं।