महराजगंज। चुनाव में नोटा का बटन दबाकर मतदाताओं ने अपनी नाराजगी व्यक्त की है। नोटा का मतलब कोई प्रत्याशी पसंद नहीं है। सभी विधानसभा क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नाराजगी सदर विधानसभा के वोटरों में देखने को मिली। इस वजह से यहां सर्वाधिक 2070 लोगों ने नोटा का बटन दबाया। सबसे कम फरेंदा में 1696 वोट नोटा को मिला है। वर्ष 2019 के चुनाव में 10 हजार से अधिक लोगों ने नोटा का बटन दबाया था।
वर्ष 2024 के चुनाव की बात करें तो वर्ष 2019 के लोकसभा से इस बार मतदाताओं की नाराजगी नोटा के आंकड़ों से कम देखी जा रही है, लेकिन आंकड़े देखकर साफ है कि बड़ी संख्या में लोगों ने नोटा का बटन दबाया है। संकेत है कि ऐसे भी मतदाता हैं जो बूथ पर वोट देने आते तो जरूर हैं, लेकिन नोटा दबाकर अपनी नाराजगी व्यक्त कर वापस चले जाते हैं।
मतदान केंद्रों पर अगर यह लोग नहीं जाते तो इनकी नाराजगी परिलक्षित नहीं हो पाती, लेकिन नोटा की वजह से इनकी मनोस्थिति का अनुमान लगाया जा रहा है। व2019 के लोकसभा चुनाव में 10478 लोगों ने नोटा का बटन दबाया था। इस बार के चुनाव में 9730 लोगों ने इसका प्रयोग किया है। 748 लोगों ने इस बार कम नोटा दबाया। विधानसभा वार नोटा पर नजर डालें तो फरेंदा में 1696, नौतनवां में 1928, सिसवा 2039, महराजगंज 2070, पनियरा में 1997 लोगों ने नोटा का बटन दबाकर अपनी नाराजगी इस बार दिखाई है।