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Maharajganj News: सावधान! होली का रंगीन चिप्स-पापड़ कर देगा बीमार

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हाथ नहीं अब लोगों को भा रहा रेडिमेड चिप्स और पापड़, लोगों ने घरों में बनाना छोड़ा
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खराब आलू और चावल का चिप्स में किया जा रहा इस्तेमाल, मसाले और रंगों की मिलावट से देखने में लग रहे आकर्षक
महराजगंज। होली नजदीक है। इसकी खुमारी लोगों में अभी से दिखने लगी है। चिप्स, पापड़ की दुकानें भी सजने लगी हैं। लोग भीड़ से बचने के लिए खरीदारी भी कर रहे हैं। पहले लोग घरों में पापड़ और चिप्स बनाते थे लेकिन अब लगभग हर घर में रेडीमेड चिप्स और पापड़ ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं। ऐसे में बाजार में मिलने वाले रंगीन चिप्स और पापड़ सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसको ध्यान में रखकर खरीदारी करें।
चार मार्च को होली का पर्व है। ऐसे में दुकानदार भी अपनी तैयारी में जुट गए हैं। गुझिया की मिठास के अलावा मुंह का स्वाद बढ़ाने वाली चीजें बाजार में बिकनी शुरू हो गई हैं। गुझिया के अलावा होली में सबसे अधिक पापड़ और चिप्स की मांग रहती है। ऐसे में धंधेबाज इसमें मुनाफा कमाने में भी कहीं से पीछे नहीं रहते हैं। खराब हो रहे आलू और चावल का चिप्स में इस्तेमाल कर मसाला और रंगों की मिलावट से इसे बाजारों में बेच दिया जा रहा है।
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आंखों को भाने और स्वादिष्ट लगने वाले यह चिप्स-पापड़ असल में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। अधिक मुनाफे के लिए धंधेबाज इसमें रंगों का इस्तेमाल करते हैं। रासायनिक तत्वों की मिलावट से चिप्स-पापड़ सेहत के लिए खतरनाक हो जाते हैं। पिछले साल होली पर्व पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने कुछ दुकानों से चिप्स, लड्डू, पापड़, बर्फी के नमूने लिए थे। इसमें नमूने फेल भी हुए थे। धंधेबाज चिप्स में निर्धारित मात्रा से अधिक रंग मिलाते हैं और पापड़ को आकर्षक दिखाने के लिए उसमें सिंथेटिक कलर मिलाया है।
60 से 160 रुपये किलो तक बिक रहे चिप्स
बाजार में रंगीन चिप्स और पापड़ 60 रुपये से लेकर 200 रुपये किलो की दर से बिक रहे हैं। इसके बाद भी इनकी बिक्री हो रही है। दुकानदार भी बाहर से सामान मंगा रहे हैं। इन चिप्स और पापड़ में आलू और चावल के अंश नजर नहीं आते हैं। इनकी चमक देखकर लोग आकर्षित हो जाते हैं।
फरवरी माह में ही खाद्य सुरक्षा विभाग ने लिए नमूने
खाद्य सुरक्षा विभाग ने 19, 20, 21, 22 फरवरी जनपद के अलग-अलग हिस्से से 11 नमूने लेकर जांच के लिए भेजे हैं। 19 फरवरी से सेखुवानी बाजार में मिठाई की दुकान से बर्फी, मदनपुरा कुट्टी स्थित एक फैक्ट्री से नमकीन व फरेंदा से सोयाबीन तेल के नमूने लिए थे। 20 फरवरी को एक फैक्ट्री से बेसन व वनस्पति का नमूना तथा परतावल में मिठाई की दुकान से पेड़ा का नमूना व सिसवा बाजार के बस स्टैंड स्थित मिठाई की दुकान से छेना की मिठाई के नमूने लिए थे। 21 फरवरी को महराजगंज में एक रेस्टोरेंट से खोआ व सिसवा बाजार में मिठाई की दुकान से खोआ व छेना की मिठाई के नमूने लिए। जबकि 22 फरवरी को शहर में ही एक मिठाई की दुकान से खोआ का नमूना संग्रहित कर जांच के लिए भेजा गया है। टीम ने अब तक विभिन्न बाजारों से 11 नमूने संग्रहित कर जांच के लिए नमूने भेजे हैं।
खराब आलू से तैयार किए जा रहे चिप्स और पापड़
पिछले साल होली के समय बाजार में चाइनीज पापड़ और कचरी अधिक बिक्री हुई थी। इस बार होली पर बाजार में इंडोनेशिया के नाम से पापड़ और चिप्स लाए एए हैं। इनमें क्या मिलाया गया है इसकी जानकारी किसी को नहीं है। चटकीले रंगों से बनी ये कचरी, चिप्स और पापड़ लोगों को खूब भा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि धंधेबाज बाजार में खराब हो रहे आलू को औने-पौने दाम पर खरीदकर इसे चिप्स और पापड़ के तौर पर खपा दे रहे हैं। इससे उनको भारी-भरकम मुनाफा हो रहा है। ये चिप्स और पापड़ चाइनीज के नाम से बिक रहे हैं। इनमें आलू और चावल के अंश नजर नहीं आते हैं।
लिवर खराब कर सकते हैं रंग-बिरंगे चिप्स
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉक्टर पवन कुमार सिंह ने बताया कि रंग-बिरंगे चिप्स खाने से लिवर पर असर पड़ता है। पाचन क्रिया प्रभावित होती है। सबसे बढ़िया है कि घर में चिप्स बनाकर खाएं। इससे शरीर को नुकसान नहीं होगा।
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शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर जारी
होली पर्व को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने टोल फ्री नंबर जारी किया है। किसी भी मिलावट की शिकायत उपभोक्ता टोल फ्री नंबर 18001805533 पर शिकायत कर सकते हैं।
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