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Maharajganj News: पुरावशेष बता रहे हैं यहां ढाई हजार साल पहले था सुसज्जित नगर

Sun, 10 Mar 2024 02:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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लक्ष्मीपुर। क्षेत्र के बनरसिहा कला में प्राचीन स्थल का उत्खनन जारी है। बौद्ध टीले से उत्खनन में जो मृदभांड, दीवारें, सिक्के, मूर्तियां मिल रही हैं वह ढाई हजार साल पहले की सभ्यता की कहानी बयां कर रही हैं। ये सभी पुरावशेष कुषाणकालीन के पहले की बताई जा रही हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि प्राचीन काल में जो लोग निवास कर रहे थे उनका धर्म, संस्कृति व परम्परा बौद्ध धर्म से ही प्रभावित लग रहा है। फिलहाल यहां मिल रहे पुरावशेषों की गहन जांच के बाद ही किसी ठोस नतीजे पर पहुंचा जा सकता है। पुरातत्वविदों को उम्मीद है कि जल्द ही बनरसिहा कला के टीके में छुपे रहस्यों से पर्दा उठेगा। अधिक संख्या में मिट्टी के जल पात्र मिल रहे हैं।
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जानकारी के मुताबिक अब तक मिट्टी के नाद व हण्डी, पानी भंडार करने का एक विशाल जलपात्र, रिंग वेल मिले है। दूसरी तरफ चौड़ी, चौंडी दीवारें, मृदभांड पुरावशेषों का मिलना जारी है। खुदाई जैसे जैसे आगे बढ़ रही है उसमें जो पुरावशेष व दीवारें मिली हैं व सभी अवशेष अति प्राचीन बताई जा रही हैं। जानकारों का माने तो जैसे जैसे उत्खनन आगे बढ़ रहा है अब कुषाण काल के अंतिम और शुंग काल का प्राथमिक चरण चल रहा है। जल्द ही शुंग काल के पुरावशेष मिलने की पूरी संभावना है। पुरातत्वविदों और विभागीय अधिकारियों का मानना है कि यहां जिस संस्कृति व सभ्यता के लोग निवास कर रहे थे उनका संबंध बौद्ध धर्म और परंपराओं से ही प्रतीत हो रहा है। इतिहासकारों को उम्मीद है कि यहां के उत्खनन से इतिहास के रहस्यों से पर्दा जल्द ही उठने वाला है।
पुरातत्व अधिकारी रामविनय का कहना है कि उत्खनन में टीम को लगातार मिट्टी के बर्तन और कुषाण काल के पुराने ईंट ही निकल ही रहे हैं। वर्तमान में मिट्टी के नाद, हण्डी, वर्तन, जल पात्र आदि मिल रहे हैं। जिससे यह सम्भावना लगाई जा रही है कि इन बड़े बड़े पात्रों में लोग अनाज रख रहे थे। खुदाई में चौड़ी चौंडी दीवारें मिल रही हैं। जो छतिग्रस्त हो गर हैं। इसी तरह से पूरा अवशेष मिलते रहे तो कुछ दिनों बाद स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो जाएगी। वर्तमान में जो मृदभांड मिट्टी के बर्तन और ईंट ही निकल रहे हैं जिनका संबंध कुषाण काल से लग रहा है। उससे इतना तो स्पष्ट हो गया है कि यहां बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग का सुसज्जित नगर था। जोकि अब से दो हजार वर्ष पहले का है। शुक्रवार को पानी रखने का मिट्टी का विशाल वर्तन मिला है उसे स्थानीय भाषा मे टैंक या जार भी कह सकते हैं।
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