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Maharajganj News: अंधा मोड़ बना हादसे की वजह, दंपती व मासूम सहित कई बन चुके शिकार

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बृहस्पतिवार को बलुअही धूस चौराहे से आगे मोड़ पर ट्रेलर की टक्कर से दंपती और मासूम की हो गई थी मौत
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शुक्रवार को तीनों शवों का मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार किया गया सुपुर्देखाक
एक साथ दफन किए गए तीन शव, नम हुईं सभी की आखें

सिंदुरिया। बृहस्पतिवार को कोठीभार थाना क्षेत्र के भारत खंड पकड़ी निवासी दंपती और 10 माह की बच्ची की मौत घटनास्थल पर मौजूद अंधे मोड़ के कारण हुई। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस अंधे मोड़ के कारण पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। कुछ दिनों पहले एक युवक पैर दुर्घटना में फैक्टर हो गया था।
कोठीभार थाना क्षेत्र के भारत खंड पकड़ी निवासी दंपती और 10 माह की बेटी का शव शुक्रवार को घर पहुंचते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। एक साथ तीन शव देखकर परिजनों के साथ ही ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गईं। बृहस्पतिवार को तीनों की स्थानीय थाना क्षेत्र के बहुअही धूस के पास ट्रेलर की टक्कर से मौत हो गई थी। शुक्रवार को तीनों शवों को मुस्लिम मान्यताओं के अनुसार सुपुर्देखाक किया गया।
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बलुहई धूस निवासी रामसकल ने बताया कि बहुअही धूस के पास अंधे मोड़ पर आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। स्थानीय लोग इस मोड़ पर काफी पहुंचते ही सतर्क हो जाते हैं। दंपती सहित बच्ची की मौत की दुर्घटना से स्थानीय लोगों में दुख और आक्रोश है। वहीं संदीप ने बताया कि अंधे मोड़ पर कोई संकेत अथवा स्पीड ब्रेकर नहीं होने से चालक सतर्क नहीं हो पाते हैं। वह वाहन की स्पीड कम नहीं करते हैं और नतीजे के तौर पर दुर्घटनाएं हो जाती हैं।
वहीं राहगीर अविनाश ने बताया कि बरवा गांव में जाने वाले रास्ते से लेकर चौराहे के आगे तक मोड़ है। आगे खेखड़ा नाला का पुल भी संकरा है। विभागीय अधिकारी यदि सतर्क रहते तो इन दुर्घटनाओं को रोका जा सकता था।
बृहस्पतिवार को नौशाद अपनी पत्नी व बच्ची के साथ घर से परतावल दवा कराने जा रहा था। अभी वह बलुअही धूस चौराहे से आगे मोड़ पर पहुंचा था कि पीछे से गिट्टी खाली कर वापस जा रहे ट्रेलर ने टक्कर मार दी। दुर्घटना इतनी वीभत्स थी कि घटनास्थल पर ही तीनों की मौत हो गई और सड़क पर मांस के टुकड़े बिखर गए। सूचना पर पुलिस पहुंची और तीनों शवों को कब्जे में लेकर विधिक कार्रवाई में जुट गई। जानकारी के अनुसार, तीनों का शव एक साथ जब गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया। गांव और अगल-बगल के गांव वाले भी पीड़ित के घर पहुंच गए। नौशाद की मां ने बताया कि बेटे ने तो अभी गृहस्थी शुरू की थी और नतिनी शहजादी ने तो अभी दुनिया देखी नहीं।
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पिता भुलई ने बताया कि बड़ा बेटा बाहर रहता है लेकिन नौशाद घर पर रहकर सारे कामों में हाथ बंटाता था। नौशाद परिवार की सभी जिम्मेदारियों को निभाता था। उसने जीवन-यापन के लिए चार भैंस पाल रखी थीं। ग्राम प्रधान सुनील गुप्ता ने बताया कि नौशाद इतना मिलनसार था कि कभी भी उसके अंदर हिंदू-मुस्लिम की भावना नहीं दिखी। गांव में हर किसी के घर आयोजित कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था।
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