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Maharajganj News: नौतनवा में बन रहा 36 फुट का रावण, आज हाेगा पुतला दहन

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- 21 दिनों से नौतनवा के राम-जानकी मंदिर में बन रहा रावण का पुतला
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- वर्ष 1956 में जमींदार चौधरी ने रामलीला का मंचन प्रारंभ कराया था
संवाद न्यूज एजेंसी
नौतनवा। कस्बे में लगातार 67 वें वर्ष रावण दहन होता रहा है। इस बार 36 फुट का रावत का पुतला बनाया गया है। रामलीला मैदान सब्जी मंडी में रावण के पुतले का दहन मंगलवार को होगा। भारत और नेपाल के लोग इस रावण दहन कार्यक्रम के साक्षी रहेंगे।
जानकारी के मुताबिक, नौतनवा कस्बे की रामलीला मैदान सब्जी मंडी में रामलीला वर्ष 1952 से नौतनवा में हो रही है। दशकों पुरानी इस परंपरा को आज भी समिति के लोग संजोए हुए हैं। नौतनवा रामलीला कमेटी के अध्यक्ष लालमन प्रसाद जायसवाल ने बताया कि 1956 में जमीदार चौधरी ने रामलीला का मंचन प्रारंभ कराया 1962 से 68 तक हजारी प्रसाद जायसवाल की देखरेख में रामलीला होने लगी, उस समय कमेटी का गठन नहीं हुआ था। जब उनके बड़े भाई विश्वनाथ प्रसाद जायसवाल ने 1968 में कार्यभार संभाला उस समय श्री रामलीला कमेटी नौतनवा का गठन हुआ। उन्होंने 1990 तक जिम्मेदारी का निर्वहन किया। वहीं दशहरा के मौके पर रावण के पुतले का दहन भी होता है।
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गोरखपुर से कपड़ा मंगाकर रावण का पुतला बना
नौतनवा में रावण 36 फुट का बन गया है। यह 21 दिन में बनकर तैयार हुआ है। इसकी लागत 15 से 20000 रुपये की है। कपड़े नौतनवा बाजार और गोरखपुर से भी मंगाए गए हैं। पुतले का दहन 24 अक्तूबर को रामलीला मैदान सब्जी मंडी में होगा। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष लालमन प्रसाद जायसवाल ने बताया कि नौतनवा के ठाकुर मंदिर परिसर में निर्माण हो रहा है। इसको बनाने वाले घनश्याम है, जो पुरंदरपुर के निवासी हैं।

नेपाल के कई गांवाें से लोग आते हैं
- रामलीला कमेटी के अध्यक्ष लालमन प्रसाद जायसवाल ने बताया कि नौतनवा का रामलीला का मेला विजयदशमी के उपलक्ष में मनाया जाता है। इस दिन रावण के पुतले का दहन होता है। सब्जी मंडी में नेपाल के बैरघाट,बोगड़ी, त्रिलोकपुर, मझगावां,कटया,बगौली हरदी ,परसिया, मदनपुर, शिवपुर, गोनहा, मर्यादपुर ,भुवरी और भारतीय गांव के हरदी डाली, खनुआ, कैथवलिया उर्फ बरगदही, जारा, त्रिलोकपुर, पहुनी, लोहसी, पुरैनिहा, खोरिया बाजार, कड़जहिया, सोनपिपरी, जगरनाथपुर, बरवाभोज आदि गांव के लोग भी आते हैं।
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रामलीला देखने के लिए लोग बैठने के लिए घर से लेकर आते थे बोरा
लालमन प्रसाद जायसवाल कहते हैं कि नगर के सब्जी मंडी में दशहरा मेला लगता है। जिसमें नेपाल सहित अनेक गांवों के दर्शन आते हैं। एक समय था, जब रामलीला मंचन के दौरान दरी व कुर्सियों की व्यवस्था नहीं रहती थी। कलाकार भूमि पर ही मंचन करते थे। लोग बैठने के लिए बोरा घर से लेकर आते थे। वर्ष 1990 में उनको कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया उस समय रामलीला के मंचन में 5600 खर्च हुए, लेकिन आज एक से डेढ़ लाख रुपये तक खर्च पहुंच जाता है।
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