ट्राम वे रेल संरक्षण के नाम पर 25 लाख खर्च, फिर भी बदहाल
खुले आसमान के नीचे रखे गए उपकरणों में लग रहे जंग
संवाद न्यूज एजेंसी
लक्ष्मीपुर (महराजगंज)। सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के लक्ष्मीपुर के एकमा डिपो में बंद ब्रिटिश कालीन ऐतिहासिक धरोहर ट्राम वे रेल परियोजना के उपकरण जंग खा रहे हैं। 25 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी ट्राम- वे रेल बोगियां, ट्राली एवं अन्य उपकरण इधर-उधर पड़े हैं। पर्यटन, रेल व वन विभाग के तमाम जिम्मेदार कई बार निरीक्षण में आए, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
सोहगीबरवा जंगल की बहुमूल्य वनसंपदा को दुर्गम वनक्षेत्र से मुख्य रेल लाइन तक लाने के लिए ब्रिटिश हुकूमत के दौरान वर्ष 1924 में लक्ष्मीपुर रेलवे स्टेशन के निकट ट्राम वे रेल परियोजना स्थापित की गई थी। जिसके निर्माण में 351243 रुपये खर्च हुए थे, जिसमे लक्ष्मीपुर रेंज और उत्तरी चौक रेंज के जंगल में 22.4 किमी दूरी तक रेल लाइन बिछाई गई थी। निरंतर 55 वर्षों की सेवा कर के 8 लाख घाटे के बाद 1982 में ट्राम वे रेल परियोजना को बंद करना पड़ा। 4 इंजन, 26 बोगियां व सैलून, 2 निरीक्षण ट्राली सहित अन्य उपकरणों को एकमा डिपो में सुरक्षित रखा गया। विगत 15 अक्तूबर 2008 को तत्कालीन वनमंत्री फतेहबहादुर सिंह ने इसे ऐतिहासिक धरोहर में शामिल करते हुए संरक्षित करने का निर्देश दिया था, लेकिन प्रस्ताव फाइलों में दब गया। शासन के निर्देश पर बार्डर एरिया डवलपमेंट वर्ष 2015-16 के तहत विरासत स्थल के रूप में ट्राम वे रेल परियोजना लक्ष्मीपुर को चयनित किया गया। 6 हेक्टेयर के एकमा डिपो में रखे गए ब्रिटिश कालीन ट्राम वे लौह सम्पदा को एकत्र कर धरोहर के रूप में रखने का आदेश था। जिसके लिए 25 लाख रुपये शासन से जारी हुआ। इसके सुरक्षा एवं ग्रामीण पर्यटन विकास के लिए लक्ष्मीपुर के एकमा में स्थित ट्राम वे रेल परियोजना के प्रारम्भिक बिंदु एकमा डिपो परिसर में रखे इंजन, टंडल, सैलून बोगी, स्पेशल बोगी, गार्डयान एवं अन्य उपकरणों में से कुछ को एकत्र कर टीनशेड गोदाम में रख दिया गया, लेकिन अब भी अधिकांश बोगियां, ट्राली व अन्य उपकरण बाहर खुले में पड़े हैं।
वनक्षेत्राधिकारी लक्ष्मीपुर विनोद तिवारी ने बताया कि ट्राम वे रेल परियोजना के ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने का कार्य हमारे कार्य काल का नहीं है। बार्डर एरिया डवलपमेंट वर्ष 2015-16 के तहत विरासत स्थल के रूप में ट्राम वे वे रेल परियोजना के संरक्षण का कार्य तत्कालीन अधिकारियों द्वारा कराया गया है। ट्राम वे को संरक्षित करने के लिए शासन के धन व निर्देश मिलने का इंतजार है।