प्रयाग में (इलाहाबाद) गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम तट पर आज मकर संक्रांति के दिन शाही स्नान के साथ ही महाकुंभ का शुभारंभ हो गया। सबसे पहले महानिर्वाणी अखाडे़ के संतों ने संगम तट पर आस्था की डुबकी लगाई, उसके बाद अटल अखाड़े के संतों ने भी स्नान किया। पूरे 147 वर्षों बाद बने इस दुर्लभ ग्रहीय संयोग पर स्नान के लिए दुनिया भर से काफी तादाद में श्रद्धालु आए हुए हैं।
शाही स्नान के शुभारंभ के साथ ही श्रद्धालु भी संगम के पावन जल में डुबकी लगा रहे हैं। शाही स्नान में महानिर्वाणी, अटल, निरंजनी, आनंद और जूना के आवाहन तथा अग्नि अखाड़े के साधु-महात्माओं ने गंगा में डुबकी लगाई। इसके बाद बैरागियों का क्रम आया, जिसमें सबसे आगे निर्वाणी अनी, बीच में दिगंबर, फिर निर्मोही अनी के संत स्नान किए। तीसरे चरण में नया उदासीन, बड़ा उदासीन और सबसे अंत में निर्मल के संतों ने डुबकी लगाई। शाही स्नान में संन्यासियों के साथ बड़ी संख्या में नागा सन्यासी भी शामिल हुए। आज लगभग एक करोड़ लोगों के स्नान करने का अनुमान है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
शाही स्नान में सभी तेरह अखाड़ों के साधु-महात्माओं, आचार्य और महामंडलेश्वरों की मौजूदगी खास है। अखाड़ों के लिए सामान्य स्नानार्थियों से इतर विशेष घाट बनाए गए हैं। आस्था और विश्वास के प्रतीक इस शताब्दी के दूसरे महाकुंभ की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। प्रत्येक अखाड़े को स्नान के लिए 40 मिनट का समय निर्धारित है। 55 दिन चलने वाले इस महाकुंभ मेले में छह शाही स्नान होंगे।
साधु वेश धारण करने को बदली हेयर स्टाइल
महाकुंभ में साधु-संतों की आकर्षक वेशभूषा के बीच उनके विदेशी भक्त भी खुद को उन्हीं के रंग में ढाल रहे हैं। अखाड़ों में आए कई विदेशी युवाओं ने अपने बालों में साधु-संतों की तरह चोटी और जटा बनाने के लिए उच्च तकनीक का इस्तेमाल किया है।
नहीं होगी मोबाइल नेटवर्क की समस्या
भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) ने महाकुंभ में मोबाइल और बेसिक फोन के साथ ब्रॉडबैंड की व्यवस्था की है।