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कागजों में रह गई लखनऊ विवि की वर्चुअल क्लास

Thu, 25 Oct 2012 12:05 PM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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लखनऊ विश्वविद्यालय में वर्चुअल क्लास एवं प्रशिक्षण का सपना कागजों में ही सिमट गया है। जितने दबे-चुपके विश्वविद्यालय के जिम्मेदारों ने उच्च शिक्षा मंत्री से इसका फीता कटवाया था उसी तरह से वर्चुअल क्लास एवं इसके पोर्टल से भी आम छात्र अनिभज्ञ है। एकेडमिक स्टाफ कॉलेज में बना वर्चुअल क्लास शो पीस बन कर रह गया है और इसके वेबपोर्टल पर जाना फिलहाल जानकारी से अधिक समय की बर्बादी साबित हो रहा है।
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लखनऊ विश्वविद्यालय में वर्चुअल क्लास एवं ट्रेनिंग शुरू करने की कवायद वर्षों पुरानी है। एकेडमिक स्टाफ कॉलेज में यह सुविधा शुरू की जानी थी और वहीं से इसकी गतिविधियों का संचालन होना था। तर्क यह था कि नियमित रिफ्रेशर एवं ट्रेनिंग कोर्स आयोजित होने के चलते वेबपोर्टल के लिए लर्निंग मैटीरियल आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। काफी मशक्कत के बाद एकेडमिक स्टाफ कॉलेज में वर्चुअल क्लास के लिए दो कमरे तैयार किए गए और उसका एक वेबपोर्टल बना। इसमें 1.17 करोड़ रुपये खर्च हो गए।

मूल्यांकन में गड़बड़ियों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच पिछले वर्ष 21 सितंबर को उच्च शिक्षा मंत्री एवं उच्च शिक्षा सचिव ने इसका उद्घाटन किया। उद्घाटन के दौरान कुलपति से लेकर विश्वविद्यालय के आला अधिकारियों के दावे ऐसे थे कि वर्चुअल क्लास विश्वविद्यालय के शैक्षिक परिदृश्य को बदल देगा। हर विभाग के लेक्चर ऑनलाइन किए जाने, कॉलेजों को लिंकअप किए जाने, विदेशी विश्वविद्यालयों से जोड़े जाने से लेकर गांवों तक पहुंच बनाने जैसी मौखिक योजनाओं एवं घोषणाओं का अंबार लग गया था। लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद भी हालात जस के तस हैं।
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वेबपोर्टल www.luvet.in के माध्यम से बाहरी संस्थाओं को जोड़ने की बात तो दूर अभी तक विश्वविद्यालय के 500 शिक्षक तक नहीं जुड़ सके हैं। वेबसाइट के अधिकतर लिंक अंडर कंस्ट्रक्शन हैं। लर्निंग रिसोर्स सेक्शन में केवल कंप्यूटर साइंस से जुड़े दो विषयों पर जानकारियां उपलब्ध हैं जो पोर्टल पर उद्घाटन के तीन महीने पहले अपलोड की गई थीं। केमिस्ट्री विभाग के शिक्षक डॉ. अनिल मिश्रा के अलावा किसी भी शिक्षक का लेक्चर पोर्टल पर ढूंढने से भी नहीं मिलेगा। उद्घाटन के समय तत्कालीन उच्च शिक्षा सचिव के सवाल पर आला अधिकारियों ने 15 दिन में कॉमर्स के लेक्चर अपलोड करने की बात कही थी, लेकिन आलम यह है कि लेक्चर तो दूर पोर्टल पर फैकल्टी का प्रोफाइल तक मौजूद नहीं है।

किसी भी फैकल्टी, उससे जुड़े विभागों का कोई भी लिंक या जानकारी पोर्टल पर नहीं डाली गई है। फैकल्टी के लिंक या तो अंडर कंस्ट्रक्शन बताए गए या वहां यह दर्शाया गया है कि उस पेज का कंटेंट एकेडमिक स्टाफ कॉलेज के द्वारा विकसित किया जाना है। एकेडमिक स्टॉफ कॉलेज में बने वर्चुअल क्लास की देख-रेख कर रहे निदेशक ही न आज तक अपना कोई लेक्चर अपलोड कर सके हैं और न ही वेबसाइट की जिम्मेदारी संभाल रहे जिम्मेदार। ऐसे में बाकी शिक्षकों से सामंजस्य एवं मैटीरियल अपलोड करने की कितनी कोशिश हुई होगी यह खुद एक सवाल है।

क्या थे दावे
ऑनलाइन मिलेगा कोर्स मैटीरियल
ऑनलाइन होंगे टीचर्स लेक्चर
मॉक टेस्ट से परख सकेंगे क्षमता
गेस्ट एक्सपर्ट्स के होंगे टिप्स
लाइव वर्चुअल क्लास से घर बैठ हो सकेगी पढ़ाई

क्या है हकीकत
कंप्यूटर साइंस विभाग के दो टॉपिक के अलावा कोई कोर्स मैटेरियल नहीं
केमिस्ट्री के प्रो. अनिल मिश्रा के सिवा किसी के लेक्चर वेबसाइट पर नहीं
मॉक टेस्ट की सुविधा अभी अंडर कंस्ट्रक्शन
गेस्ट एक्सपर्ट्स का लिंक अंडर कंस्ट्रक्शन
किसी भी फैकल्टी का प्रोफाइल एवं सब्जेक्ट अपलोड नहीं


जिम्मेदारी किसकी यह पता नहीं
शासन ने जिस महत्वाकांक्षी योजना के जरिये लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों को घर बैठे पढ़ाई की सुविधा देने का सपना देखा था उसकी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी किसके पास है यह तय नहीं है। एकेडमिक स्टाफ कॉलेज के निदेशक प्रो. पद्मकांत का कहना है कि वर्चुअल क्लास की चाबी उनके पास है और एकेडमिक स्टाफ कॉलेज के लेक्चर उसमें कभी-कभी कराए जाते हैं। वेबसाइट का अभी तक किराया जमा नहीं हो सका है। इसको भी विश्वविद्यालय की वेबसाइट से ही लिंक करने की कवायद चल रही है। वेबसाइट की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट देख रहे प्रो. आरके मिश्र को सौंपी गई है। वहीं, प्रो. आरके मिश्र का कहना है कि उन्हें कोई ऐसा आदेश अभी तक नहीं मिला है। वहीं, लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रवक्ता प्रो. राजेश मिश्र ने इस संदर्भ में बात की गई तो उन्होंने इस संदर्भ में जानकारी होने से मना कर दिया।
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