प्रदेश की राजधानी के आसपास के इलाकों में बसे किसान परेशान हैं। देश के 53 बड़े शहरों में लखनऊ ऐसा शहर है, जहां सबसे ज्यादा किसानों ने खुदकुशी की। यह चौंकाने वाला सच नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की वर्ष 2012 की रिपोर्ट में सामने आया है।
225 लोगों ने की खुदकुशी
रिपोर्ट के मुताबिक, लखनऊ में वर्ष 2012 में कुल 225 लोगों ने खुदकुशी की। इनमें से सबसे ज्यादा 119 लोग खेती के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। 119 में से 25 महिलाएं हैं। राजधानी में खुदकुशी करने वालों में एक बड़ी संख्या (107) 45 से 59 वर्ष के उम्र वालों की है।
आर्थिक तंगी बड़ी वजह
लखनऊ विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मधुरिमा प्रधान का कहना है कि राजधानी में रहने वाले किसानों की खुदकुशी के पीछे आर्थिक तंगी, उनके निजी संबंधों में तनाव और सुविधाओं का अभाव एक बड़ी वजह है। वे जो भी निर्णय लेते हैं उस पर तत्काल अमल कर लेते हैं, क्योंकि गांवों में ऐसे लोगों की काउंसलिंग की कोई व्यवस्था नहीं है।
अधेड़ उम्र के लोगों में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ने की एक बड़ी वजह यह है कि उम्र के इस दौर में व्यक्ति कई तरह के बदलाव के दौर से गुजर रहा होता है। कम होती क्षमताएं, बच्चों से दूरियां और परिस्थितियों से भिड़ने की प्रवृत्ति में कमी उन्हें मानसिक रूप से कमजोर बना देती हैं। वे जरा सा भी तनाव नहीं झेल पाते हैं।
जहर छूटा पीछे, फंदे का बढ़ा चलन
राजधानी में जहर खाकर खुदकुशी करने के मामले कम हो गए हैं। लोग खुदकुशी के लिए फंदे पर लटकने के तरीके को ज्यादा अपना रहे हैं। राजधानी में हुई 225 खुदकुशियों में से 136 लोगों ने फांसी पर लटककर जान दी। जबकि जहर व अन्य विषाक्त पदार्थ खाकर जान देने वालों की संख्या 49 रही। इसके बाद लोगों ने ट्रेन व चलते वाहनों के सामने कूदकर जान देने का तरीका अपनाया।
शादीशुदा आत्महत्या करने में आगे
राजधानी में शादीशुदा लोग जान देने में आगे रहे। खुदकुशी करने वाले 225 लोगों में 206 शादीशुदा थे। रिकॉर्ड के मुताबिक, खुदकुशी करने वालों में बड़ी संख्या (209) ऐसे लोगों की है जो या तो अनपढ़ (83) थे या 12वीं तक (126) पढ़े लिखे।