बहेड़ी में बकाया गन्ना मूल्य भुगतान की मांग को लेकर मंगलवार को किसान भड़क गए। उन्होंने केसर केसर चीनी मिल के डिस्टलरी गेट पर ताला बंदी कर वहीं धरना प्रदर्शन कर दिया। सूचना पर पहुंचे तहसीलदार ने किसानों को मनाया और 15 दिन की मोहलत पर धरना खत्म हुआ।
विज्ञापन
मंगलवार को गन्ना समिति प्रांगण में किसानों की बैठक हुई। इसके बाद भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसान नारेबाजी करते हुए केसर चीनी मिल पहुंच गए। वहां डिस्टलरी गेट पर ताला बंदी कर दी और धरने पर बैठ गए। किसानों को संबोधित करते हुए किसान नेता रवि ढाका ने कहा कि किसान एक-एक रुपये के लिए परेशान है लेकिन मिल प्रशासन और प्रदेश सरकार ने आंखें बंद कर ली हैं। सब कुछ साजिश के तहत किया जा रहा है।
जगत सिंह ने कहा कि किसानों को बकाया 75 करोड़ रुपया तत्काल दिलाया जाए। कमल सिंह ने कहा कि प्रशासन ने चीनी की नीलामी की तिथि घोषित करने के बाद सारी प्रकिया को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। नीलामी की प्रकिया को करने में तेजी लाने वाले तहसीलदार का भी तबादला कर दिया गया है। दोपहर बाद तहसीलदार अजय कुमार उपाध्याय धरना स्थल पर पहुंचे और किसानों को समझाया।
विज्ञापन
हाईवे पर लगा जाम
भारतीय किसान यूनियन के तालाबंदी अभियान ने एनएच-58 से गुजर रहे यात्रियों के छक्के छुड़ा दिए। भाकियू के काफिले में शामिल दर्जनों गाड़ियों के कारण हाईवे पर करीब एक घंटे तक जाम लग गया। हाईवे के दोनों ओर दो किलोमीटर तक लगे लंबे जाम ने राहगीरों के भीषण गर्मी के पसीने छुड़ा दिए। भाकियू का काफिला गुजरने के करीब एक घंटे बाद हाईवे पर यातायात सामान्य हो सका। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने ऐलान किया है कि जब तक किसानों को पाई-पाई का भुगतान नहीं हो जाता ताले नहीं खोले जाएंगे।
राकेश टिकैत सुबह करीब 11 बजे दर्जनों गाड़ियों के काफिले के साथ मोदी शुगर मिल के गेट पर पहुंचे थे। भाकियू नेता हरेंद्र नेहरा के नेतृत्व में कार्यकर्ता पहले से वहां मौजूद थे। मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, अमरोहा, मेरठ आदि जगहों से आए कार्यकर्ता नारे लगाते हुए मोदी शुगर मिल गेट पर पहुंचे। कुछ लोगों ने राकेश टिकैत को बताया कि यह गेट तो मोदी शुगर मिल का है।
मोदी शुगर बंद करना राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत की घोषणा में शामिल नहीं है। इस पर वह पीछे हट गए। फिर कुछ लोगों ने बताया कि मोदी शुगर मिल के मालिक उमेश मोदी की डिस्टलरी फैक्ट्री का रास्ता भी इसी गेट से है तो मिल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया गया । इसके बाद टिकैत जुलूस के रूप में उमेश मोदी की दूसरी यूनिटों रेवलोन व टीसी हेल्थकेयर पहुंचे। भाकियू कार्यकर्ताओं ने फैक्ट्रियों के गेटों पर ताले ठोंक दिए।
भुगतान होने तक रहेगी तालाबंदी
पत्रकारों ने राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने से पूछा ये ताले कब तक लगे रहेंगे? जवाब में टिकैत ने कहा कि जब तक किसानों को पाई पाई का भुगतान नहीं हो जाता तब तक मिल पर इसी प्रकार ताले लगे रहेंगे।
12 अगस्त को सह यूनिटों पर तालाबंदी की थी घोषणा दरअसल, भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने घोषणा की थी यदि पश्चिमी उतर प्रदेश के शुगर मिल मालिकों द्वारा किसानों का भुगतान नहीं किया जाता तो 12 अगस्त को उन मिल मालिकों की सहयोगी यूनिटों पर भाकियू ताले ठोंकेगी।
मूक दर्शक बने रहे अधिकारी तालाबंदी के दौरान एसडीएम कृष्णा करुणेश व सीओ सोमवीर सिंह मय फोर्स के मौके पर मौजूद थे और एसपी देहात जगदीश शर्मा कोतवाली में घटनाक्रम पर नजर टिकाए थे। हालांकि ये सभी अफसर भाकियू की कार्यवाही पर मूक दर्शक बने रहे। सीओ सोमवीर सिंह ने गोलमोल जवाब दिया कि लॉ एंड ऑर्डर पर उनकी निगाह थी।
‘टांग ना तोड़ डालेंगे उसकी’ मोदी शुगर मिल के गेट पर भाकियू के कार्यकर्ता जब ताला ठोंक रहे थे तब किसी पत्रकार ने राकेश टिकैत से पूछा कि ये (मिल प्रबंधन) बाद में ताला तोड़ डालेंगे तो तभी भाकियू के एक बुजुर्ग कार्यकर्ता ने तपाक से जवाब दिया कि ‘उसकी टांग ना तोड़ डालेंगे’ तो हंसते हुए राकेश टिकैत ने कहा-सुन लिया जवाब।
हम किसान भाई-भाई पैसा लेंगे पाई-पाई टिकैत के काफिले में शामिल एक गाड़ी में लाउडस्पीकर लगा था, जिसमें यूनियन के कार्यकर्ता यह नारा लगा रहे थे कि हम किसान भाई-भाई पैसा लेंगे पाई-पाई।
मैनेजमेंट बोला, हो रहा चीनी की बिक्री का शत-प्रतिशत भुगतान
मोदी शुगर मिल के मैनेजर (लाइजनिंग) कपिल आनंद का कहना है कि शासन के आदेश पर प्रशासन ने मिल प्रबंधन को चीनी बेचने की अनुमति प्रदान की है। चीनी बिक्री का शत प्रतिशत भुगतान किसानों को दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन चाहता है कि जल्द से जल्द चीनी बिके, ताकि किसानों को भुगतान हो सके।
मिलों में काम रहा जारी भाकियू ने मिलों के गेट पर भले ही ताले ठोंक दिए हों, किंतु मिलों में पूर्व की भांति काम जारी है। दरअसल, जिन मिलों में ताले ठोंके गए हैं। उनमें कार्यरत कर्मचारियों एवं स्टाफ को मिल से बाहर नहीं निकाला गया। दूसरे जिन फैक्ट्रियों पर ताले ठोंके गए हैं। वह मोदी इंडस्ट्रीज परिसर में स्थित हैं। इन मिलों में जाने के दूसरे रास्ते भी हैं।
मुरादाबाद में पुलिस ने चीनी मिलों पर छापे मारे। कोठियों तक फोर्स पहुंची। मगर भुगतान धेले भर का नहीं हो पाया। लेकिन किसानों की बेटियों द्वारा कमिश्नर को बांधी गई राखियों का ऐसा असर हुआ कि छह दिन में 36 करोड़ रुपये दे दिए। बीस करोड़ की एडवाइज जारी कर दी गई। हालांकि अभी भी बकाया 699 करोड़ है।
मंडल की बाइस चीनी मिलों ने किसानों का गन्ना खरीदा था। भुगतान की स्पीड शुरू से ही बेहद कमजोर रही। आप इसी से अंदाजा लगा लीजिए कि अभी चीनी मिलों पर फरवरी, मार्च और अप्रैल तक का पेमेंट बकाया है। किसानों ने कई दफा आंदोलन किए। कभी कमिश्नरी घेरी तो कभी कलेक्ट्रेट। अफसर मिल वालों की मीटिंग बुलाते तो हर बार शीघ्र भुगतान का भरोसा मिलता। लेकिन पेमेंट नहीं हो रहा था। यहां किसानों की बेटियां आगे आईं और देश के प्रधानमंत्री को राखी भेजी। उपहार में गन्ना भुगतान मांगा गया। मंडलायुक्त शिवशंकर सिंह को भी राखी बांधी गई। उनसे भी उपहार में बकाया पेमेंट मांगा गया। कई दिनों तक सिलसिला चला।
कमिश्नर ने पांचों जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि चीनी मिलों के गोदाम पर पुलिस लगा दी जाए। चीनी का भंडारण कब्जे में ले लिया जाए। मजिस्ट्रेट लगवाकर चीनी की बिक्री कराएं और उस पैसे से किसानों का पेमेंट करें। यह धमकी वाकईऱ् काम दिखा गई। शुगर लॉबी में हल्ला मच गया। पेमेंट होने लगा। पांच अगस्त तक मंडल की चीनी मिलों पर 735 करोड़ का बकाया था लेकिन अब 699 करोड़ रह गया है। हालांकि अभी भी बकाया पेमेंट का आंकड़ा बहुत बड़ा है। 699 करोड़ एक मोटी रकम है। लेकिन अगर प्रशासन सख्ती दिखाए तो मिल वाले इस पैसे को भी एक झटके में दे सकते हैं।
अभी भी 47 लाख बोरा चीनी मुरादाबाद में चीनी मिलों के गोदाम अभी भी चीनी से भरे पड़े हैं। 47 लाख बोरा चीनी गोदामों में है। अगर प्रशासन सख्ती करे तो शुगर लाबी इसे बेचकर भुगतान कर सकती है।