कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) के तहत चिकित्सक का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है।
पंजीकृत चिकित्सक के अलावा अन्यत्र गर्भपात कराने को अवैध माना जाएगा। दोषी डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी। क्रियान्वयन के लिए पांच सदस्यीय टीम का गठन किया गया है।
यूपी में कन्या भ्रूण हत्या रोकने के तमाम दावे असंतोषजनक साबित हुए हैं। अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के लिए दंपति को अब केवल मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) यानि चिकित्सीय गर्भ समापन केंद्र पर ही जाना होगा।
इसके लिए प्रशिक्षित डॉक्टर को अन्य अहर्ताओं के साथ सीएमओ कार्यालय में पंजीकरण कराना होगा। जो डॉक्टर एमटीपी में पंजीकरण कराए बगैर गर्भपात करने में शामिल होंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
एमटीपी में पंजीकृत डॉक्टर को गर्भपात के कारणों की जानकारी भी देनी होगी। निगरानी के लिए पांच सदस्यीय टीम का गठन कर दिया गया है।
सीएमओ डॉ वीके जौहरी जिला स्तरीय कमेटी के चेयरमैन हैं। अन्य सदस्यों में जिला महिला चिकित्सालय की सीएमएस डॉ मृदुला अग्रवाल, डीपीआरओ महेंद्र सिंह, प्राइवेट डॉक्टर सुनीता जैन व समाजसेवी बीना शर्मा को रखा गया है। सीएमओ ने बताया कि एमटीपी के अलावा अन्यत्र गर्भपात कराना अवैध माना जाएगा।
क्या है एमटीपी?
अल्ट्रासाउंड के बाद गर्भपात रोकना स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती होता है। एमटीपी से पंजीकृत डॉक्टर को गर्भपात के कारणों का पूरा विवरण रखना होगा। वैध और अवैध डॉक्टरों की लिस्ट तैयार करना स्वास्थ्य विभाग के लिए आसान रहेगा। छापेमारी में आसानी होगी।