ललितपुर। बीते सप्ताह से सर्दी के मौसम का असर नजर आने लगा है, लेकिन शहर में सर्दी से बचाव के लिए नगर पालिका द्वारा आधे अधूरे इंतजाम किए गए हैं। सदनशाह स्थित रैन बसेरा में सफाई तक नहीं हुई है। वहीं नई बस्ती स्थित रैन बसेरा में पहुंचने के लिए रास्ता तक नहीं है। अधिकांश रैन बसेरों न तो पलंग है न ही गद्दा और रजाई की कोई व्यवस्था है। ऐसे में जरूरतमंद व बेसहारा लोगों को सर्दी ठिठुरना पड़ रहा है। वहीं कहीं पर अभी ताला लटका हुआ है।
शहर में जरूरतमंद व बेसहारा लोगों को सर्दी से बचाव के लिए नगर पालिका द्वारा रैन बसेरा में व्यवस्था की जाती है। इसमें पलंग, गद्दा, रजाई व कंबल आदि की सुविधा होती है। लेकिन वर्तमान में शहर के अधिकांश रैन बसेरा बद इंतजामी का शिकार बने हुए हैं। ऐसे में जरूरतमंद, बेसहारा लोगों को सर्दी की ठिठुरन से परेशान होना पड़ रहा है। शहर में अधिकांश रैन बसेरा में सर्दी से बचाव के इंतजाम नहीं किए गए हैं। रैन बसेरा तो दूर अलाव जलाने तक की व्यवस्था नहीं की गई है।
शहर के सदनशाह के पास स्थित रैन बसेरा में सर्दी से बचाव की सुविधाएं तो दूर सफाई तक नहीं हुई है। परिसर के आसपास गंदगी बनी हुई है। सफाई न होने से लोगों को रहना तो दूर पास में पहुंचना भी मुश्किल होगा। दरवाजे पर गंदगी पड़ी हुई है। रैन बसेरा में ताला लटक रहा है। अंदर कबाड़ पड़ा हुआ है। सर्दी से बचाव के कोई इंतजाम नहीं है।
वहीं, मोहल्ला गांधीनगर स्थित चंडी मंदिर परिसर में स्थित रैन बसेरा तक पहुंचने में परेशानी बनी हुई है। यहां पर रास्ते में ही पत्थर पड़े हुए हैं। साथ ही उपले भी थोपे जा रहे हैं। इससे लोग इस रैन बसेरा में जाने से गुरेज करेंगे। साथ ही रैन बसेरा में ठहरने के इंतजाम नहीं है। पलंग की कोई व्यवस्था नहीं गई है।
मोहल्ला घुसयाना स्थित बस स्टैंड पर यात्रियों व बेसहारा लोगों को ठहरने के लिए प्रतीक्षालय बना है, जो सुविधाओं के अभाव में शोपीस साबित हो रहा है। यहां पर ठहरने के कोई इंतजाम नहीं है। न तो गद्दा हैं और न ही रजाई। लोगों को राहगीरों व यात्रियों को रात गुजारने के लिए अन्य स्थानों पर भटकना पड़ता है। कई तो टिनशेड के नीचे ही सोकर रात बिताते हैं।
रैन बसेरा में सुविधाएं, पर पलंग के नीचे भरा पानी
शहर कोतवाली के सामने स्थित शिक्षक रैन बसेरा में नगर पालिका ने सर्दी से बचाव के लिए जरूरतमंद व बेसहारा लोगों को ठहरने की सुविधाएं की गई है। वर्तमान में 27 पलंग डाले गए हैं, इन पर गद्दा व रजाई भी डाली गई है लेकिन पलंगों के नीचे पानी भरा हुआ है। इसकी निकासी नहीं हो रही है। सूखने का इंतजार किया जा रहा है।
नहीं जलाए जा रहे अलाव
शाम का मौसम शुरू होते ही सर्दी बढ़ जाती है। लोग ठिठुरने से बचाव के लिए होटल व अन्य दुकानों पर ठिकाना तलाशते हैं। अलाव में अभाव में सर्दी से परेशान हो रहे हैं।, नगर पालिका द्वारा अब तक अलाव की व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में लोग सर्दी से बचाव नहीं कर पा रहे हैं।