ललितपुर। शहर की यातायात में भीषण समस्या बने ब्याना नाला के नए पुल के निर्माण का राज्यमंत्री मनोहर लाल पंत व सदर विधायक रामरतन कुशवाहा ने संयुक्त रूप से चुनाव से पहले शिलान्यास कर दिया लेकिन निर्माण कार्य अब तक नहीं शुरू हो सका। पुल के निर्माण में जल संस्थान और बिजली विभाग के बीच पाइप और लाइन शिफ्टिंग का मामला उलझा हुआ है। दोनों ही विभागों को इसके लिए लोक निर्माण विभाग ने स्टीमेट के हिसाब से शिफ्टिंग चार्ज करीब 40 लाख रुपये जमा करा दिए थे लेकिन दोनों ही विभागों ने लापरवाही बरतते हुए अब तक काम नहीं कराया। चुनाव जीतने के बाद दोनों विधायकों ने पुल निर्माण कार्य के संबंध में कोई सुधि तक नहीं ली।
शहर में जेल चौराहा स्थित ब्याना नाला के संकरे पुल से हो रही यातायात की समस्या से निजात के लिए शासन ने नए पुल के निर्माण को स्वीकृति दी है। इस नए पुल को पांच मीटर ऊंचा, 12 मीटर चौड़ा और 50 मीटर लंबाई में निर्माण किया जाना है। इस पुल के निर्माण को लेकर सात जनवरी को राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ, सदर विधायक रामरतन कुशवाहा व जिला पंचायत अध्यक्ष कैलाश नारायण निरंजन ने भूमि पूजन किया था। पीडब्ल्यूडी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पुल बनाने के लिए वहां से पुरानी लाइन शिफ्टिंग होनी थी जिसके लिए जल संस्थान को 25 लाख रुपये और हाईटेंशन लाइन को शिफ्ट करने के लिए 15 लाख तीन हजार रुपये स्टीमेट के अनुसार जमा करा दिए गए थे लेकिन दोनों ही विभागों की लचर कार्यप्रणाली के चलते अब तक न तो लाइन शिफ्ट हुई और नहीं पाइप लाइन को अब तक शिफ्ट किया गया। यही वजह है कि अब तक ब्याना नाला पुल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। हैरत की बात तो यह है कि उद्धाटन के बाद विधायक व राज्यमंत्री ने भी मौके पर जाकर काम न होने के संबंध में जिम्मेदारों से बात करना मुनासिब नहीं समझा। भीषण गर्मी में जहां लोगों को पांच मिनट भी धूप में ठहरना मुश्किल हो रहा है। पर जाम में मजबूरत दस से आधा घंटे तक खड़ रहना पड़ता है।
बिजली के खंभा हटाने के लिए विभाग को एस्टीमेट की राशि का भुगतान कर दिया है, लेकिन हाईटेंशन लाइन न हटने से निर्माण कार्य शुुरू नहीं हो पा रहा है। - सुबोध कुमार, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग
ब्याना नाला पुल के निर्माण में हाईटेंशन लाइन हटाने के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसके बाद लाइन हटाई जाएगी। - विमल कुमार, अधिशाषी अभियंता, विद्युत विभाग
पेयजल लाइन शिफ्टिंग के लिए टेंडर प्रक्रिया की स्वीकृत के लिए मुख्यालय फाइल भेजी गई है। स्वीकृत मिलते ही टेंडर निकाले जाएंगे। इसके बाद काम शुरू हो सकेगा। संजीव कुमार, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान