ललितपुर। वीरांगना अवंतीबाई लोधी के बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शहर में वीरांगना की प्रतिमा लगाने की घोषणा की गई।
तुवन मंदिर प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि हर व्यक्ति की एक ही इच्छा रहती है कि वह अपनी माटी का कर्ज चुकाए। वीरांगना अवंतीबाई ने भी देश की खातिर अपना बलिदान दिया था। उन्होंने मंच से नगर पालिका अध्यक्ष से शहर में वीरांगना अवंतीबाई की प्रतिमा लगवाए जाने को कहा। इस पर नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने मंच से प्रतिमा लगवाए जाने की घोषणा भी कर दी।
राज्यपाल कल्याण सिंह ने अपने संबोधन में वीरांगना की प्रतिमा के लिए नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा दी गई सहमति की सराहना की और भावुक होकर कहा कि अब दोबारा ललितपुर आ पाऊंगा या नहीं, लेकिन वीरांगना की प्रतिमा लगेगी तो अच्छा लगेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान उन्होंने लखनऊ, अलीगढ़ आदि स्थानों पर भी वीरांगना की प्रतिमाएं लगवाई हैं। ललितपुर पालिका अध्यक्ष ने इतनी जल्दी सहमति दे दी है, यह अच्छी बात है।
विभिन्न दलों के लोग मौजूद रहे
ललितपुर। संभवता यह पहला मौका होगा, जब राज्यपाल के कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग पंडाल में मौजूद रहे। इतना ही नहीं, पार्टी के लोगों ने मंच से संबोधन भी दिया।
पगड़ी पहनाई गई
ललितपुर। झांसी से आईं भारतीय जनता पार्टी की नेता लक्ष्मी देवी राजपूत ने कल्याण सिंह को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया। इसके अलावा स्वामी ब्रह्मानंद ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने माल्यार्पण किया। कार्यक्रम में मुकेश राजपूत, अरविंद सिंह, भरत सिंह राजपूत, कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष दुर्गाप्रसाद कुशवाहा, अनिल जैन सीमा, हरकिशन बाबा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन आरएन शुक्ला ने किया, जबकि आभार कार्यक्रम संयोजक गंधर्व सिंह लोधी ने व्यक्त किया।
पूर्व मंत्री ने बटोरी तालियां
ललितपुर। भारतीय जनता पार्टी के बुजुर्ग नेता और कल्याण सिंह सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे डा. अरविंद जैन ने कहा कि वीरांगना का बलिदान बेकार नहीं जाना चाहिए। लोग स्वार्थ के पीछे अपने देश के टुकड़े करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। लोग अपनी कुर्सी के पीछे भारत मां के टुकड़े करने को तैयार हैं। अब ईमानदारी की कोई बात नहीं करता, लेकिन बाबूजी (कल्याण सिंह) ने इसकी मिसाल पेश की है। उनके संबोधन के दौरान पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कल्याण सिंह ने उन्हें पंडाल से मंच पर बुलाया था।