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गौना में विंन्ध्याचल पर्वत पर विराजमान हैं वरवासन देवी

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छोटी माता मंदिर - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर/डोंगराखुर्द। गौना के पास विंध्याचल पर्वत पर स्थित वरवासन देवी माता का प्राचीन मंदिर है। यहां नव दुर्गा पर्व पर बड़ी संख्या में भक्त माता के दर्शनों के लिए यहां आते हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण किसी के व्यक्ति के द्वारा नहीं कराया गया माता रानी की कृपा से स्वयं तैयार हुआ माना जाता है। पहाड़ियों पर बने इस मंदिर में सीढ़ियां चढ़कर भक्त मंदिर में पहुंचते हैं। यहां पर तीन मंदिर हैं एक बड़ी शिला है उसके नीचे मंदिर बने हुए हैं। नवरात्र पर यहां दूर-दूर से भक्त माता के मंदिर पर दर्शन करने एवं ज्वारे चढ़ाने आते हैं। माता की भक्तों पर विशेष कृपा होती है। मान्यता है कि मां के दरबार में मनौती मांगने वाले की गोदी कभी खाली नहीं रहती।
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ग्रामीणों का कहना है कि माता की कृपा से प्राकृतिक आपदाएं भी टल जाती हैं। महाराजा छत्रसाल ने गौना आकर वरवासन माता के दर्शनकर माता का आशीर्वाद लिया था। जिन लोगों ने माता के दर्शन कर लिए जब भी इस रुट से गुजरते हैं, वह माता रानी के दर्शन जरूर करने आते हैं। बुजुर्ग लोगों के अनुसार मंदिर के पीछे ही माता रानी का मायका है और वही पर छोटी देवी का मायका भी स्थित है। मंदिर के आस पास बड़ी संख्या में प्राचीन मूर्तियां बिखरी पड़ी हैं। नवरात्र के पावन अवसर पर यहां भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है।
यह है मंदिर का इतिहास
बुजुर्ग बताते हैं कि हजारों साल पुराना मंदिर है और यहां पर एक किला भी था। जिसके अवशेष मिलते हैं खंङ़ित मूर्तियां बिखरी पड़ी हैं और कई मूर्ति पूर्व में चोरी चली गईं। जनप्रतिनिधि एवं प्रसाशन ध्यान देता तो यह मंदिर नेशनल हाईवे के किनारे लगा हुआ है जिससे पर्यटन के रूप में विकसित हो सकता है। -महिपाल सिंह
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यह मंदिर विंध्याचल पर्वत की श्रृंखला पर बना है। यहा पर नवरात्र में यहां विशेष आयोजन होते हैं और माता की कृपा से भक्तों के बिगड़े काम बनते हैं। दर्शन करने से लोगों को ऐसा प्रतीत होता है, जैसे साक्षात दैवीय शक्ति विराजमान हो। - बृजेश पटैरिया

माता के मंदिर पर ध्वजा लेकर जाते श्रद्धालु- फोटो : LALITPUR

मंदिर में विराजमान देवी माता- फोटो : LALITPUR

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