ललितपुर। बजाज पावर प्लांट में कोयले की रैक तो रोजाना आ रहीं हैं, लेकिन बिजली उत्पादन के अनुसार समय पर पर्याप्त कोयला नहीं मिल पा रहा है, जिसके चलते कोयले का संकट बरकरार है। ऐसे मेें बजाज प्लांट की बंद चल रही एक यूनिट जल्द शुरू होने की संभावना नहीं है। स्थिति सामान्य होने में लगभग एक सप्ताह से अधिक का समय लग सकता है।
जनपद में चिगलौआ स्थित बजाज पावर प्लांट में 660 मेगावाट क्षमता की तीन यूनिट से 1980 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। इसके लिए प्लांट की सभी इकाइयों को चलाने के लिए प्रतिदिन पांच से सात कोयले की जरूरत पड़ती है, लेकिन बीते दिनों बिहार व झारखंड में भारी बारिश की वजह से वहां कोयले की खदानों में पानी भर गया, जिसकी वजह से वहां कोयले का प्रोडक्शन मात्र 25 फीसदी तक रह गया है। ऐसे में जहां पहले सौ रैक कोयले की लोड होती थी, वर्तमान में मात्र 22 से पच्चीस रैक ही लोड हो रही है। ऐसे में सरकार द्वारा निर्णय लिया गया कि जहां पावर प्लांट में तीन दिन से कम का कोयला है, वहां पहले रैक पहुंचाने की व्यवस्था की गई और ललितपुर के बजाज पावर प्लांट में भी सभी इकाइयों को चलाने के लिए तीन दिन से कम दिन का कोयला होने की स्थिति आ गई, जिसके चलते बजाज प्लांट की एक इकाई को बंद करके बाकी दो इकाइयों से बिजली उत्पादन किया जा रहा है। बृहस्पतिवार को छह रैक लोड होने पर चार रैक कोयला आ चुका है, जबकि दो रैक आ रहा है। जबकि सामान्य दिनों में प्रतिदिन छह से सात रैक कोयला की आवश्यकता होती है।
कोयले की कमी के चलते चिगलौआ प्लांट की एक यूनिट बंद चल रही है। सभी तीनों इकाईयों के संचालन के लिए प्रतिदिन छह से सात रैक कोयले की आवश्यकता होती है। अभी स्थित सामान्य होने में एक सप्ताह तक का समय लग सकता है।
नयन शर्मा, पीआरओ, बजाज प्लांट।