संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) लागू होने के दो वर्ष पूरे होने पर जनपद पुलिस ने नए कानून के तहत जांच और अभियोजन में उल्लेखनीय सफलता का दावा किया है। पुलिस के अनुसार बीएनएस के तहत दर्ज 11 सनसनीखेज मामलों में समयबद्ध विवेचना पूरी कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किए गए, जिसके बाद आरोपियों को सजा दिलाई गई।
एक जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) लागू हुई थी। इसमें 531 धाराएं हैं। यह संहिता ब्रिटिश शासनकाल की करीब 150 वर्ष पुरानी भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के स्थान पर लागू की गई थी। बीते दो वर्षों में जिले के सभी थानों और कोतवाली में बीएनएस के तहत ही मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
नए कानून के लागू होने के शुरुआती दौर में थाना-कोतवाली में तैनात मुंशियों और विवेचकों को धाराओं की जानकारी हासिल करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट दर्ज करने और विवेचना के दौरान पुलिसकर्मी बीएनएस की पुस्तिका का सहारा लेते रहे। हालांकि समय के साथ पुलिसकर्मियों को अधिकांश धाराओं की जानकारी हो गई, लेकिन गंभीर अपराधों के मामलों में अब भी संहिता का संदर्भ लेना पड़ता है। पुलिस विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, एक जुलाई 2024 से 30 जून 2025 तक जिले में 3,665 मुकदमे दर्ज किए गए। वहीं, एक जुलाई 2025 से 30 जून 2026 तक 3,653 मुकदमे दर्ज हुए। इन मामलों में साक्ष्य एकत्र कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किए गए। साथ ही प्रभावी पैरवी के जरिए न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।
पुलिस का कहना है कि इसी का परिणाम रहा कि बीएनएस की धाराओं के तहत चल रहे 11 सनसनीखेज मामलों में आरोपियों को सजा दिलाई जा सकी। पुलिस अधीक्षक मोहम्मद मुश्ताक ने बताया कि नए कानून के तहत दर्ज 11 मुकदमों में समयबद्ध विवेचना पूरी कर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की गई और आरोपियों को सजा दिलाई गई। उन्होंने कहा कि बीएनएस का उद्देश्य वैज्ञानिक साक्ष्यों, डिजिटल जांच और त्वरित त्वरित न्याय को बढ़ावा देना है।