ललितपुर। मुरादाबाद में आबादी के आसपास घूम रहे और रेस्क्यू किए गए दो नर तेंदुओं को ललितपुर लाकर गौना रेंज के पटना-पारौल के घने जंगल में छोड़ दिया गया। मुरादाबाद से ललितपुर लाने के दौरान वन विभाग की टीम ने दोनों तेंदुओं की खुराक का ध्यान रखा। साथ में चिकित्सकों की टीम भी रही, जिसने रास्ते में तेंदुओं की चिकित्सकीय जांच की। जंगल में छोड़ने के बाद वन विभाग उनकी निगरानी कर रहा है।
मुरादाबाद में पिछले कुछ समय से तेंदुओं की मौजूदगी से लोग परेशान थे। वन विभाग की टीम ने आबादी के आसपास घूम रहे दो तेंदुओं को रेस्क्यू किया था। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के निर्देश पर मुरादाबाद वन विभाग की टीम 26 अगस्त को दोनों तेंदुओं को लेकर ललितपुर पहुंची और इसकी जानकारी जिला वन अधिकारी को दी।
इसके बाद डीएफओ और रेंजर के नेतृत्व में वन विभाग की टीम दोनों तेंदुओं को गौना रेंज के डोंगराखुर्द बीट स्थित पटना-पारौल के घने जंगल में ले गई। यहां दोनों को अलग-अलग पिंजरों से निकालकर सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ दिया गया। तेंदुओं को लाते समय वन विभाग की टीम ने उनकी खुराक का विशेष ध्यान रखा। रास्ते में निर्धारित समय पर उन्हें भोजन दिया गया। चिकित्सकों की टीम भी साथ रही और समय-समय पर दोनों तेंदुओं की स्वास्थ्य जांच की गई। पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने के बाद उन्हें जंगल में छोड़ा गया।
वन विभाग आबादी वाले क्षेत्रों से रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों को उनकी प्रकृति के अनुकूल सुरक्षित स्थान पर छोड़ता है। तेंदुओं के जंगल में छोड़े जाने के बाद गौना रेंज की टीम उनकी गतिविधियों पर निगरानी रख रही है। आसपास के ग्रामीणों को जंगल में न जाने और सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
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घना जंगल और कम मानवीय दखल बना वजह
मुरादाबाद का क्षेत्र गन्ने के खेतों से घिरा होने के कारण तेंदुओं के आबादी के करीब आने की संभावना अधिक रहती है। इसके विपरीत ललितपुर के वन क्षेत्रों में घनी झाड़ियां और पथरीला भूभाग है तथा मानवीय दखल अपेक्षाकृत कम है। वन विभाग के अनुसार, यह क्षेत्र तेंदुओं के प्राकृतिक आवास के लिए अनुकूल है। इसी कारण रेस्क्यू किए गए तेंदुओं को चिकित्सकीय जांच के बाद उच्चाधिकारियों की अनुमति से यहां छोड़ा गया।
मुरादाबाद से लाए गए दो तेंदुओं को पटना-पारौल के जंगल में छोड़ा गया है। गौना रेंज के रेंजर के नेतृत्व में टीम उनकी निगरानी कर रही है।
नवीन प्रकाश शाक्य, डीएफओ, ललितपुर