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Lalitpur News: गोविंद सागर बांध के जीर्णोद्धार के लिए मिले दो करोड़ सरेंडर

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संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। बांध पुनर्वास और सुधार योजना के तहत 72 वर्ष पुराने चयनित गोविंद सागर बांध के जीर्णोद्धार के लिए विश्व बैंक से मिले दो करोड़ रुपये विभाग ने सरेंडर कर दिया है। पिछले वित्तीय वर्ष में भी चार करोड़ की धनराशि सरेंडर की गई थी। निविदा प्रक्रिया शुरू न हो पाने की वजह से ऐसा किया गया है। अगले वित्तीय वर्ष में पुन: धनराशि की मांग की जाएगी और निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
विश्व बैंक की पुनर्वास और सुधार योजना ड्रिप फेज-2 के लिए बांध को चयनित किया गया था। जीर्णोद्धार के लिए विश्व बैंक 70 फीसदी और राज्य सरकार 30 फीसदी धनराशि देती है। बांध के जीर्णोद्धार को 18.88 करोड़ की स्वीकृति मिली थी। इसके बाद अपने अंश से गोविंद सागर बांध को दो करोड़ की धनराशि सिंचाई विभाग को जारी कर दी थी। जीर्णोद्धार कार्य में गेटों का आधुनिकीकरण, बांध के अप स्ट्रीम में पिचिंग, कंक्रीट स्पिल वे निर्माण, सीपेज-लीकेज का कार्य, सोलर लाइट, डाउन स्ट्रीम का सुदृढ़ीकरण, पैराविट की मरम्मत, नहरों के गेटों पर सुरक्षा शेड लगाए जाना शामिल था। सुरक्षा ड्यूटी सहित निगरानी के लिए टाइप वन स्तर के आवासों का निर्माण कराया जाना है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में विश्व बैंक ने स्वीकृति पत्र नहीं दिया। इस कारण यह प्रक्रिया वर्ष भर अटकी रही। अब वित्तीय वर्ष समाप्त होने वाला है। इस पर सिंचाई विभाग ने शासन से मिली दो करोड़ रुपये की धनराशि को समर्पण कर दिया है।
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बांध पर दूसरा स्पिल-वे बनाने को लेकर फंस रहा विश्व बैंक व सिंचाई विभाग में पेंच
विश्व बैंक की तकनीकी समिति ने जब गोविंद सागर बांध का टेक्नीकल निरीक्षण किया था। तब बांध पर एक और स्पिल वे (गेट प्रणाली) की आवश्यकता पाई थी और स्पिल वे निर्माण के बाद ही धनराशि जारी करने को कहा था। सिंचाई विभाग ने बांध पर पूर्व से ही गेट व साइफन प्रणाली होने के कारण स्पिल वे बनाने से इन्कार कर रहा है। इस कारण से विश्व बैंक गोविंद सागर बांध के जीर्णोद्धार के लिए न तो अपने हिस्से की धनराशि दे रहा है और न ही निविदा प्रक्रिया करने के लिए स्वीकृति दे रहा है।
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गोविंद सागर बांध के जीर्णोद्धार के शासन द्वारा निर्गत दो करोड़ की धनराशि को समर्पण कर दिया है। विश्व बैंक बांध पर एक और स्पिल-वे की आवश्यकता बता रहा है। जबकि बांध पर पूर्व से गेट व साइफन प्रणाली पानी निकासी के लिए मौजूद है। इस कारण से विश्व बैंक आगे की प्रक्रिया को मंजूरी नहीं दे रहा है।
इं. शैलेष कुमार, अधिशासी अभियंता राजघाट निर्माण खंड
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