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Lalitpur News: देवगढ़ की गुफाएं देती हैं बुंदेलखंड में बौद्ध संस्कृति की दस्तक

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ललितपुर। जनपद में स्थित देवगढ़ में विंध्याचल की पहाड़ियों में बेतवा किनारे बौद्ध गुफाएं स्थित हैं, यह बौद्ध गुफाएं बुंदेलखंड में बौद्ध सभ्यता एवं संस्कृति की सूचक हैं। एक दशक पहले इन बौद्ध गुफाओं की खोज हुई। उसके पहले बुंदेलखंड को बौद्ध संस्कृति से अछूता माना जाता था। इन गुफाओं से सिद्ध होता है कि प्राचीन समय में बौद्ध भिक्षुओं व तथागत का इस क्षेत्र से जुड़ाव रहा है।
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बुंदेलखंड में ललितपुर के पुरातत्व स्थल देवगढ़ के पास बेतवा नदी के तट पर पहाड़ियों के बीच गुफाएं धार्मिकता के साथ ही पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्व का स्थल हैं। यह स्थल जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर गुप्तकालीन दशावतार मंदिर के पास प्राचीन बौद्ध गुफाएं स्थित हैं। यहां पर बौद्ध धर्म के लोग रहकर साधना करते थे और आसपास के गांव में भिक्षा मांगकर जीवन यापन किया करते थे। लंबे समय से रख-रखाव नहीं होने के कारण इनकी स्थिति खराब हो गई है। प्राकृतिक खूबसूरती और पुरातत्व संपदा से भरपूर ललितपुर के देवगढ़ में बौद्ध गुफा की खोज के बाद उसे राज्य पुरातत्व विभाग ने वर्ष 2018 में संरक्षण में लिया था। वर्ष 2013-14 देवगढ़ क्षेत्र में कुछ सैलानियों ने इस बौद्ध गुफा की खोज की थी, बाद में जिला प्रशासन व बौद्ध भिक्षुओं ने वहां पर इसकी पुष्टि की थी। इन गुफाओं में बौद्ध प्रतिमाओं के अलावा दीवारों पर प्राचीन चित्र उकरे गए थे। जिससे बौद्धों का बुंदेलखंड का जुड़ाव प्रदर्शित करता है।

बौद्ध गुफाओं से देवगढ़ बना तीन धर्मों का समागम
देवगढ़ को पूर्व में सनातन व जैन धर्म का समागम माना जाता रहा है। लेकिन बौद्ध गुफाओं के मिलने से यह क्षेत्र तीन धर्म का समागम हो गया। अब इस क्षेत्र की पहचान तीन धर्मों के रूप में जानी जाती है। विश्व पटल पर भी यह बौद्ध अनुयायियों के साधना का क्षेत्र बन गया है।
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फोटो- 38
देवगढ़ की बौद्ध गुफाएं जनपद को महात्मा बुद्ध से जोड़ता है। यहां पर इससे पहले कोई भी बौद्ध धर्म के चिह्न नहीं थे। लेकिन यहां पर यह गुफाएं बताती हैं, कि यहां पर तथागत के अनुयायियों ने साधना की है। जनपद पूरे क्षेत्र के बौद्ध संस्कृति से जोड़ता है।
जानकी प्रसाद बौद्ध।
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फोटो- 39
जैन व बौद्ध दोनों की धर्म की शिक्षा सत्य, अहिंसा व त्याग पर आधारित है। देवगढ़ में बौद्ध गुफाएं मिलने से वहां पर तीन धर्मों का समागम हो गया है। वैसे भी देवगढ़ को प्राचीन समय में देव का गढ़ यानि देवताओं के रहने स्थान कहा जाता रहा है। गुफाओं में जिस प्रकार की आकृतियां मौजूद हैं, उससे प्रमाण मिलता है कि यह बौद्ध अनुयायियों के साधना का केंद्र रहा है।
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प्रोफेसर भगवत नारायण शर्मा।
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