फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बंकरों छिपकर बचा रहे जान, धमाकों से आवाज से दहल जाता है दिल

विज्ञापन
विज्ञापन
तालबेहट(ललितपुर)। रूस और यूक्रेन के बीच चल रही वर्चस्व की जंग का सोमवार को पांचवा दिन है। छह दिन पहले यूक्रेन छोड़कर अपने गृह नगर तालबेहट आए मेडिकल छात्र योगेश झा यूक्रेन में फंसे अपने साथियों के लिए चिंतित हैं। उन्होंने बताया कि रविवार को जफरोजिया रीजन में रूसी सेना के टैंक के सड़कों पर घूमने से भारतीय साथी काफी तनाव में है। जो अपनी जान की रक्षा के लिए बंकरों में छिपे हुए हैं। उनके पास खाने की सामग्री की कमी हो गई है। वह परिजनों के साथ रहते हुए मोबाइल से उनकी भी खैरियत ले रहे हैं।
विज्ञापन

बताते चलें कि रूस और यूक्रेन के मध्य कुछ दिनों से चल रहे तनाव के बाद नगर के गंज में निवासी डॉ. योगेश झा 22 फरवरी को अपने पिता डॉ. हरिश्चंद्र और माता आशा देवी के कहने पर वहां से निजी खर्च पर अपने छह साथियों के साथ भारत के लिए चल दिए। जो 23 फरवरी को अपने घर आ गए थे। घर आते ही परिजन और मित्रों में खुशी नजर आई।
योगेश झा ने बताया कि उनका संपर्क उस दिन से यूक्रेन में रहने वाले अपने साथियों से है। रविवार को रूसी सेना के टैंक कीव के अलावा जफरोजिया प्रांत की सड़कों पर घूमने लगे हैं। कुछ मिसाइलें भी वहां गिराई गई हैं। कहा कि साथी बंकरों में छिपकर जान बचा रहे हैं। सायरन और मिसाइलों की आवाज सुन उनका दिल दहल जाता है।
विज्ञापन

वहां से भारत वापस न आने वाले मित्र राजेश गवल, श्रीनसवा, सौरभ उपाध्याय, श्रवण ठाकुर आदि से बात हो रही है। कुछ साथी यूक्रेन की सीमा लबीब पहुंच गए हैं, जहां से वह भारत आने का प्रबंध कर रहे हैं। अपने घर में काफी लंबे समय बाद परिजनों के साथ समय व्यतीत करना अच्छा लग रहा है, लेकिन यूक्रेन में रह गए भारतीयों की चिंता उन्हें सता रही है। उन्होंने भारत सरकार से वहां के छात्रों को वापस लाने की मुहिम तेज करने की मांग भी की है।
लंदन से आई बहन, दोस्त पूछ रहे यूक्रेन का हाल
यूक्रेन से भाई के वापस आने की खबर सुनते ही कुछ दिन पहले लंदन से आए जीजा महेंद्र और बहन विजेता अपने भाई से मिलने तालबेहट आई। काफी वर्षों बाद छोटे भाई से मिलकर बहन प्रसन्न हो गई। वहीं बचपन के मित्र रक्षपाल राहुल राठौर अपने मित्र के सकुशल वतन वापसी से प्रसन्न हैं। वह उनके साथ दिन में कई घंटे गुजार रहे हैं। उनसे यूक्रेन के वातावरण, वहां के लोगों के रहन सहन, खान पान, मौसम आदि के बारे में जानकारी ले रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें