ललितपुर। जिले के वन अफसर वन्य जीवों की सुरक्षा के प्रति संजीदा नहीं हैं। गत दिवस नगर के निकट की वन रेंज में मृत पाए गए तेंदुआ की सूचना अफसरों को दो दिन बाद मिल पाई। यही नहीं, मृत तेंदुआ कहां था, इस पर भी सस्पेंस बना हुआ है।
जंगल में विभिन्न प्रजातियों के वन्य जीव रहते हैं। इनमें नीलगाय, बंदर, चिंकारा, चीतल, जंगली सुअर, लंगूर, जंगली भेड़, खरगोश, सांभर, चौसिंह, रीछ, लकड़बघ्घा, अजगर, कोबरा, चमगादड़, उल्लू, लोमड़ी, सेई आदि जानवर शामिल हैं। शासन स्तर से इनकी सुरक्षा के लिए सेंचुरी जैसे प्रोजेक्टों पर काम किया जा रहा है। ललितपुर में भी महावीर वन्य जीव सेंचुरी बनी हुई है। लेकिन, जंगल में रहने वाले जानवर आज भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह वन अफसर वन पशुओं की सुरक्षा के प्रति ज्यादा चिंतित नहीं हैं। इसका ताजा उदाहरण गत दिवस ललितपुर वन रेंज में मिला मृत तेंदुआ है।
जंगल में दो दिन तेंदुआ का शव पड़ा रहा और वीट प्रभारी को इसकी भनक तक नहीं लगी। चरवाहे की सूचना पर विभागीय कर्मियों को शव प्राप्त हो सका। यही नहीं, वन कर्मियों को रेंज में तेंदुआ की मौजूदगी का भी सही पता नहीं चल सका। इस संबंध में ललितपुर रेंजर गणेश शुक्ला का कहना है कि जानवर यहां वहां विचरण करते रहते हैं। करीब एक सप्ताह पहले रेंज में तेंदुआ को देखा गया था। लेकिन, उसकी निरंतर मानीटरिंग नहीं की जा सकी।
महत्वपूर्ण बात यह है कि झांसी मंडल में तेंदुआ की संख्या निल दर्शाई जा रही है। इससे मृत तेंदुआ मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिले का होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। विभागीय अफसर पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के इंतजार में हैं।