ललितपुर। शनिवार को जनपद के दो बांधों से रिसाव होना शुरू हो गया है। शहर की सीमा पर बने 64 वर्ष पुराने गोविंद सागर बांध में दरार पड़ गई है। वहीं उटारी से पानी रिस रहा है।
गोविंद सागर बांध का निर्माण वर्ष 1952 में हुआ था। बांध का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंथ ने किया था, इसलिए बांध का नाम उन्हीं के नाम पर गोविंद सागर रखा गया था। यह बांध अपनी स्वचलित साइफल प्रणाली से भारत देश में अपनी पहचान बनाए हुए है। वर्तमान में बांध अपनी सामान्य क्षमता के अनुसार 93.50 फुट तक भरा हुआ है। इस बांध की तलहटी पर स्थित सीतापाठ घाट के पास दरार आ गई है। इसकी जानकारी सिंचाई विभाग के अधिकारियों को शुक्रवार की सुबह हुई। इस दौरान मामूली मात्रा में पानी रिस रहा था, लेकिन धीरे-धीरे पानी की मात्रा बढ़ती जा रही है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने शनिवार की दोपहर इस दरार वाले हिस्से पर रेत डाली। यदि पानी रिसना बंद नहीं होता है तो कार्ययजना बनाई जाएगी।
इस संबंध में राजघाट सिंचाई निर्माण खंड के अवर अभियंता एसएन राम ने बताया कि अभी कोई गंभीर स्थिति नहीं है। इस मामले की जानकारी से जिला प्रशासन व शासन को अवगत करा दिया गया है। वहीं विभिन्न विभागों की अधिशासी अभियंता व अवर अभियंता की टीम ने मौके का सर्वे कर लिया है। बरसात के दौरान बांध भरा रहता है, इसलिए पानी कहीं न कहीं से अपना रास्ता बना लेता है, यह सामान्य बात है।
वहीं दो साल पहले ही लोकार्पण होने वाले उटारी बांध की नहर में बिना गेट खोले ही पानी शनिवार सुबह आने लगा। नहर में पानी आने की जानकारी मिलने पर मौके पर सिंचाई विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिशासी अधिकारी नरेंद्र जाड़िया ने बताया कि नहर में पानी आपूर्ति करने वाले गेट की रबर के क्षतिग्रस्त होने से पानी रिस रहा है। रविवार को इसका सुधार कर लिया जाएगा।