ललितपुर। बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक पदोन्नति से कतरा रहे हैं। स्थिति यह है कि 16 शिक्षकों ने अपना प्रमोशन त्याग दिया है। इससे पहले अपनाई गई पदोन्नति प्रक्रिया में करीब 38 शिक्षकों ने प्रमोशन नहीं लिया था।
बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को पांच वर्ष की सेवा पर प्रमोशन प्रदान किया जाता है। पिछले माह शैक्षिक अनुभव में दो वर्ष की शिथिलता प्रदान कर 73 शिक्षकों को पदोन्नति प्रदान की गई थी, जिसमें 16 शिक्षकों ने मनमाफिक विद्यालय नहीं मिलने पर प्रमोशन का त्याग कर दिया। इससे पहले की प्रक्रिया में 364 शिक्षकों को पदोन्नति दी गई थी, इसमें भी करीब 38 शिक्षक -शिक्षिकाओं ने पदोन्नति को स्वीकार नहीं किया था।
बेसिक शिक्षा विभाग शायद इकलौता विभाग होगा, जहां इस तरह प्रमोशन छोड़े जाते हैं। वरना, अन्य विभागों में अधिकारी व कर्मचारी पदोन्नति के लिए सालों इंतजार करते हैं। बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक प्रमोशन की जगह कार्यस्थल को अहमियत देता है। यदि कार्यस्थल दूरदराज इलाके में है तो आमतौर पर शिक्षक वहां जाने को तैयार नहीं होते हैं और शिक्षक पदोन्नति छोड़ना पसंद करते हैं।
पदोन्नति छोड़ने की एक वजह यह भी
परिषदीय विद्यालयों में प्रधानाध्यापक का पद काफी महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी भरा हो गया है। प्रधानाध्यापक को वित्तीय और शैक्षिक कार्यक्रमों से लेकर मिड-डे मील का भी जिम्मा उठाना पड़ता है, जिससे विद्यालयों की हेडमास्टर पद की जिम्मेदारी उठाना आसान नहीं है। महिला शिक्षिकाएं इस पद से कन्नी काटने लगी हैं। इस बार की प्रमोशन की प्रक्रिया में भी ऐसा ही नजर आया। तमाम शिक्षिकाओं ने पदोन्नति को त्याग दिया।
एक प्रधानाध्यापक के पास कई स्कूलों का चार्ज
परिषदीय विद्यालयों में जिम्मेदारी वाली कुर्सी संभालने वाले प्रधानाध्यापक कम ही रह गए हैं। अनेक महिला शिक्षिकाएं प्रधानाध्यापक के झमेले में नहीं पड़ती हैं, जिस कारण एक प्रधानाध्यापक को कई स्कूलों के वित्तीय चार्ज संभालने पड़ते हैं। वर्तमान में तमाम प्रधानाध्यापक ऐसे हैं, जिनके पास एक से अधिक स्कूलों के वित्तीय चार्ज हैं।