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अधर में लटका गांवों को पुरानी तहसील से जोड़ने का मामला

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gov office.jpg - फोटो : gov office.jpg
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ललितपुर/सिलावन। सपा सरकार के कार्यकाल में महरौनी तहसील में शामिल डेढ़ दर्जन गांवों को नवसृजित तहसील मड़ावरा व पाली में जोड़ने पर ग्रामीणों को अभी भी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। इनका कहना है कि शासन के आदेश पर हुई जांच में तत्कालीन सहायक भूलेख अधिकारी ने नवसृजित तहसीलों में शामिल किए गए गांवों की दूरी अधिक होने की पुष्टि की थी लेकिन इस ओर कार्यवाही नहीं की गई। ग्रामीण लगातार गांवों को पूर्ववत रखने की मांग उच्चाधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों से करते आ रहे हैं लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई हैं इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा हैं जिसके चलते ग्रामीणों में रोष पनप रहा है।
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सपा सरकार के कार्यकाल में जनपद में मड़ावरा और पाली तहसील का सृजन किया था जिसमें महरौनी तहसील में शामिल सिंदवाहा, बुदनी नाराहट, सक्तू, बारचौन, गुढ़ाबुजुर्ग, पड़रिया, मुड़िया, ककरूवा, परसई, गदनपुर, बमराना, दैनपुरा, धौलपुरा, अर्जुनखिरिया, बनयाना, पियरा, गदौरा, खिरिया उबारी, मछरका, गुढ़ामड़ावरा और भौंटी नाराहट गांवों को नवसृजित तहसील पाली और मड़ावरा में शामिल कर दिया गया। ग्रामीणों इसका विरोध जताते हुए कहा था कि राजस्व अधिकारियों और
कर्मचारियों ने बिना भौगोलिक स्थिति को देखे परिसीमन प्रक्रिया अपनाते हुए मनमर्जी से गांवों को नवसृजित तहसील में शामिल कर दिया था। जिसके कारण उन्हें तहसील जाने आने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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महरौनी तहसील में सम्मिलित किए जाने का प्रस्ताव प्रस्तावित किया गया
इसको संज्ञान में लेते हुए शासन ने जांच करने के निर्देश दिए थे। ग्रामीणों ने सूचना का अधिकार के तहत जनसूचना अधिकारी से जानकारी मांगी थी जिस पर तत्कालीन जिधाधिकारी/जनसूचना अधिकारी ने पत्र के माध्यम से जानकारी दी थी कि सहायक भूलेख अधिकारी की आख्यानुसार ग्राम सिंदवाहा, सक्तू, बुदनीनाराहट, गदनपुर, परसई, मुड़िया, गुढ़ाबुजुर्ग, पडरिया, ककरूवा व बारचौन की दूरी तहसील पाली से 25 से 40 किलोमीटर के अंदर है जबकि महरौनी तहसील से 12 से 25 किलोमीटर है इसको दृष्टिगत रखते हुए इन्हें महरौनी तहसील में सम्मिलित किए जाने का प्रस्ताव प्रस्तावित किया गया है।
चार वर्षों से अधिकारियों व क्षेत्रीय विधायक व राज्यमंत्री से मांग करते आ रहे
इसी तरह बमराना, दैनपुरा, धौलपुरा, अर्जुनखिरिया, बनयाना, पियरा, गदौरा, खिरियउबारी, मछरका, गुढ़ामड़ावरा और भौंटनाराहट को मड़ावरा तहसील में सम्मिलित किए जाने का प्रस्ताव प्रस्तावित किया गया है लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद से यह मामला अधर में लटका हुआ है। ग्रामीणों को तहसील पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पाली तहसील पहुंचने के लिए उनके गांव से सीधा साधन नहीं होने के कारण टुकड़ों में यात्रा करनी पड़ती है। इससे तहसील पहुंचने में समय और धन दोनों का नुकसान हो रहा है। आरोप हैं कि इसको लेकर विगत चार वर्षों से लगातार अधिकारियों व क्षेत्रीय विधायक व राज्यमंत्री से मांग करते आ रहे हैं सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। स्थिति अभी भी जस की तस है।
क्या बोले ग्रामीण
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सिंदवाहा गांव को पाली तहसील से जोड़ना औचित्यहीन है। जांच में नवसृजित तहसीलों में शामिल किए गए गांवों की दूरी अधिक होने की पुष्टि होने के बाद भी शासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। सिंदवाहा से महरौनी महज 12 किमी है जबकि पाली 30 किमी से अधिक दूरी पर है। ग्रामीणों को पाली तक जाने में दिक्कत हो रही है। करन सिंह बुंदेला
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ग्रामीणों को पाली तहसील तक पहुंचने में काफी समय लग जाता हैं साथ ही धन की भी क्षति होती है। सिंदवाहा गांव को पुन: महरौनी तहसील में जोड़ने के लिए विगत चार वर्षों से भी अधिक समय से ग्रामीण मांग करते आ रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। हरीकिशन, ग्राम प्रधान सिंदवाहा
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पाली तहसील तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। तहसील तक पहुंचने के लिए कई जगह वाहन बदलने पड़ रहे हैं। लोगों को होने वाली परेशानियों से शासन को कई बार अवगत कराया लेकिन कोई भी सुनने को तैयार नहीं है। सत्यनारायण तिवारी
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अधिकारियों ने मनमर्जी से बिना भौगोलिक स्थिति देखे ही परिसीमन कर गांवों को नवसृजित तहसीलों से जोड़ दिया जो कि गलत है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से भी इसके लिए कोई चर्चा नहीं की जिसका खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं। -मनोहर पटेल सक्तू गांव
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