ललितपुर। कृषि विभाग ने किसानों को कलेस्टर योजना के तहत चना का मुफ्त बीज वितरण किया था। इसके लिए 98 लाख रुपये की अनुदान धनराशि शासन ने भेजी थी। यह धनराशि विभागीय अधिकारियों से सांठगांठ कर कुछ शातिर लोगों ने हड़प ली थी। किसानों की शिकायत पर जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने इसकी जांच कराई तो मौके पर जिन किसानों को बीज देने का उल्लेख कृषि विभाग पत्रावली में दर्ज था, उनके खेत में चने की फसल ही नहीं मिली थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने जांच रिपोर्ट विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को भेज दी थी। शासन ने अपर कृषि निदेशक बीज की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है।
98 लाख रुपये के इस घोटाले में सिर्फ कागजों पर ही बीज बांटे गए। विभागीय अधिकारियों ने बगैर जांच किए इन लाभार्थियों के खाते में पैसे भी पहुंचा दिए। किसान संगठनों की शिकायत पर जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की, जिसमें तीन गांव इमलिया, कारीटोरन, मिर्चवारा में चना बीज वितरण में कमी पाई गई। जांच टीम की रिपोर्ट के मुताबिक दस डिसमिल जमीन के काश्तकार को कागज पर ही 1.60 क्विंटल के बीज दे दिए गए। जब टीम जांच करने मौके पर पहुंची तो वहां खेत पर फसल ही नहीं दिखी। यही नहीं, कई किसानों को बीज दिए ही नहीं गए लेकिन उन्हें लाभार्थी दिखाया गया है। जांच में गड़बड़ी उजागर होने के बाद विस्तृत जांच और कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा गया था। शासन ने प्रदेश स्तरीय कमेटी का गठन किया गया। इसमें अपर कृषि निदेशक बीच वितरण अरविंद कुमार को अध्यक्ष और संयुक्त निदेशक कृषि और जिलाधिकारी ललितपुर को सदस्य नामित किया है। शासन के इस निर्णय से अब इस घोटाले में संलिप्त लोगों पर तलवार लटक रही है।
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जिलाधिकारी माध्यम से बीज वितरण घोटाले की जांच रिपोर्ट शासन को भेजी थी। इसमें शासन ने अपर कृषि निदेशक (बीज वितरण) की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। - अंकुर श्रीवास्तव, अपर जिलाधिकारी ललितपुर