तालबेहट। सरकार द्वारा गोचर एवं चारागाह की भूमि के पट्टे निरस्त कराने के लिए व्यापक स्तर पर चलाए जा रहा अभियान राजस्व कर्मचारियों की मनमानी के चलते मजाक बन गया है। उच्चाधिकारियों के आदेश को नजर अंदाज कर कुछ राजस्व कर्मचारी इन आदेशों की प्रविष्टियां राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं करते है। इससे पट्टा धारक उक्त व्यक्तियों को अनुचित लाभ मिल रहा है।
सरकार इस समय गोचर, चारागाह और अवैध रूप से पूर्व में किए गए कृषि पट्टों की व्यापक समीक्षा करते हुए उन्हें खारिज कराने की कार्यवाई कर रही है। इस संबंध में पट्टा धारकों को नोटिस दिया जा रहा है और उनका पट्टा गलत पाए जाने पर उसके निरस्तीकरण की कार्रवाई भी की जा रही है। लेकिन, तहसील में कार्यरत कुछ राजस्व कर्मचारी, अधिकारियों के इन आदेशों की कोई खास अहमियत नहीं मानते हैं। जिसका पट्टा धारक जमीन को विक्रय करके या बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड बनवाकर सरकार को चूना लगाने का काम कर रहे है। इससे मौके पर विवाद की स्थिति पैदा हो रही है।
तहसील अंतर्गत ग्राम बिजरौठा में किसान बाबूलाल पुत्र छतू और उसकी पत्नी दस्सी का आराजी क्रमांक 3772 का पट्टा जिलाधिकारी ने निरस्त कर दिया था। उक्त पट्टे का निरस्तीकरण आदेश 27 फरवरी 21 में दर्ज किया गया। इसके बावजूद माह 8 मार्च 21 में लेखपाल ने उक्त जमीन का भूमि प्रमाण पत्र जारी कर दिया। जब किसान अपनी पत्रावली लेकर किसान क्रेडिट कार्ड के लिए बैंक गया और बैंक अधिकारियों ने जब ऑनलाइन खतौनी का मिलान किया तो वह उक्त लेखपाल की कार्यप्रणाली को देखकर सन्न रह गए। इस संबंध में जब लेखपाल नंद लाल कुशवाहा से उनका पक्ष लिया तो उनका कहना था कि राजस्व अभिलेख देखकर ही कुछ कह सकते हैं।
वही दूसरा मामला ग्राम चंद्रापुर गांव का है। जहां काफी समय पहले गांव के लोगों को खेती के पट्टे दिए गए थे। उस समय राजस्व कर्मचारियों ने जमकर धांधली की थी। जिस पर रामानंद का आराजी क्रमांक 293 -2 में लगभग तीन एकड़ भूमि का पट्टा वर्ष 2000 में तत्कालीन जिलाधिकारी चंद्र नारायण दुबे ने खारिज कर दिया था। बाद में उसकी अपील भी आयुक्त महोदय के न्यायालय से ही 2004 में अदम पैरवी में खारिज हो चुकी थी। लगभग अठारह वर्ष बाद आज तक राजस्व अभिलेखों में उक्त निरस्तीकरण का आदेश दर्ज नहीं हुआ। जिसके चलते उक्त पट्टा धारक ने उक्त पट्टा किसी को विक्रय कर दिया। इस संबंध में गांव के जयराम,जगदीश आदि ने संपूर्ण समाधान दिवस में एक शिकायती पत्र देख कर उक्त पट्टा खारिज की प्रविष्टियां खतौनी में इंद्राज कराने की मांग की थी। लेकिन, शिकायत देने के बाद भी आज तक राजस्व कर्मचारियों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
00- पट्टा खारिज का आदेश खतौनी में दर्ज होने के बाद भूमि प्रमाण पत्र बनाना लेखपाल की काफी बड़ी गलती है। मामला संज्ञान में आया है। जांच के बाद अवश्य लेखपाल पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- अखिलेश कुमार गुप्ता, तहसीलदार तालबेट।
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- कई लेखपालों के पास है दो गांवों का कार्यभार
- तहसील में 59 राजस्व गांव है। जिसके सापेक्ष मात्र 38 में से 36 लेखपाल कार्यरत है। कई लेखपालों के पास दो दो गांवों का कार्य भार है।
- रमेश नामदेव, रजिस्ट्रार कानूनगो तालबेहट
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