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रेलवे की जमीन से हटाया अतिक्रमण

Mon, 28 Sep 2015 12:56 AM IST
ब्यूराे/अमर उजाला
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ललितपुर। रेलवे और दुकानदारों के मध्य वर्षों से चले आ रहे विवाद का रविवार को अंत हो गया। रेलवे ने सात दुकानदारों की दुकानों के अवैध कब्जे को हटाकर जमीन पर अपना कब्जा कर लिया। कार्रवाई सुबह तड़के से ही शुरू हो गई थी, जिसमें दोपहर तक अतिक्रमण हटा दिया गया।
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रेलवे स्टेशन के बाहर स्थित सात दुकानों वाली जमीन पर मालिकाना हक की लड़ाई को लेकर रेलवे और दुकानदार वर्षों से लड़ रहे थे। इस लड़ाई का रविवार को अंत हो गया। रेलवे की जमीन से अवैध कब्जा हटाए जाने के लिए रेलवे ने जिला प्रशासन से सहयोग मांगा था, जिसके चलते शनिवार की शाम को एसडीएम सदर रमेश चंद्र व रेलवे के  अफसरों ने दुकानदारों को रविवार की सुबह तक स्वयं ही अपना सामान हटाने और जमीन को कब्जा मुक्त करने की चेतावनी दी थी।



रविवार की सुबह रेल प्रशासन के अधिकारियों समेत जीआरपी, आरपीएफ, एसडीएम व पुलिस फोर्स रेलवे स्टेशन के बाहर कब्जा हटाने को पहुंच गया। भारी पुलिस बल देख दुकानदारों ने दुकानों से अपना सामान खुद ही हटाना शुरू  कर दिया। सामान हटाने के बाद रेलवे ने जेसीबी मशीन से दुकानों को तोड़ना शुरू कर दिया। हालांकि, दुकानों से सामान सुरक्षित हटाने को लेकर हल्के विवाद की स्थिति भी बनी, लेकिन रेलवे अधिकारियों ने गैंगमेनों की सहायता से सामान शीघ्र हटाने में मदद की, जिससे दोपहर एक बजे तक अतिक्रमण हटा दिया गया। इस मौके पर एसडीएम सदर रमेश चंद्र तिवारी, रेलवे के सहायक मंडल अभियंता अनुरक्षण रवि  शर्मा, सीनियर सेक्सन इंजीनियर आरके सिंह, आरपीएफ थाना प्रभारी के पी बुंदेला, जीआरपी  थाना प्रभारी महेश दुबे, लेखपाल मुन्नीलाल समेत भारी पुलिस फोर्स  मौजूद रहा।
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यह था मामला  
उक्त भूमि पर मालिकाना हक का मामला सबसे पहले पीसीई एक्ट रेलवे न्यायालय में चलाया गया। जहां से मई 2004 में न्यायालय ने रेलवे के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद यह मामला जनपद स्थित अपर जिला जज न्यायालय में चलाया गया। यहां से भी अक्तूबर 2009 में रेलवे के पक्ष में फैसला सुनाते हुए दुकानदारों की अपील खारिज कर दी गई। जिस पर दुकानदारों ने एडीजे कोर्ट के निर्णय को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन यहां से भी दुकानदारों को मायूसी ही हाथ लगी और हाईकोर्ट ने 17 जुलाई 2014 को रेलवे के पक्ष में निर्णय सुना दिया। न्यायालय से राहत मिलने पर रेलवे ने पिछले साल अगस्त व सितंबर 2014 को अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई की, लेकिन दुकानदारों के भारी विरोध और सामाजिक संगठनों के हस्तक्षेप के चलते कब्जा नहीं हटाया जा सका था। इसके बाद एक बार फिर दुकानदारों ने स्टे के लिए सुप्रीम कोर्ट में रेस्टोरेशन दाखिल किया, जिसे न्यायालय ने 29 अगस्त 2014 को स्वीकृत कर उसी दिन बहस के बाद खारिज कर दिया। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि उक्त सभी सातों दुकानदारों को सुप्रीम कोर्ट से स्टे की मंजूरी नहीं मिली और दुकानदारों को दिया गया समय भी पूरा हो चुका है। जिसके चलते अब उक्त भूमि से अवैधघ कब्जा हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।


अब रेलवे वसूलेगा किराया
रेलवे अब दुकानदारों से उक्त जमीन का लाखों रुपये किराया वसूलेगा। इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि किराया वसूलने के लिए दुकानदारों को नोटिस भेजा जाएगा।



तीन महीने बाद मिला प्रशासन का सहयोग
रेलवे के अफसरों ने जून माह में डीएम व पुलिस अधीक्षक को अनाधिकृत अतिक्रमण हटाने को सहयोग किए जाने के लिए पूरे मामले से अवगत कराया था। लेकिन, इस प्रक्रिया में पूरे तीन माह लग गए। जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की ओर से सहयोग मिलने के बाद रेलवे ने रविवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है।
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