ललितपुर। प्रकृति ईश्वर का वरदान है। प्रकृति की रक्षा ही ईश्वर की सच्ची आराधना है। श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों से गोवर्धन पर्वत की पूजा करके संपूर्ण संसार को प्रकृति की पूजा का संदेश दिया। उक्त उद्गार श्रीजी कुंज कांप्लेक्स, डोंडाघाट में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास आचार्य हेमंत कृष्ण महाराज ने प्रकट किए।
महाराज ने कहा कि व्यक्ति को सदैव उदार रहना चाहिए। उदार हृदय प्रभु को बहुत पसंद आता है। पीड़ित मानव की सेवा, सबके प्रति दया का भाव, हमें मानव बनाता है। उन्होंने कहा कि अपनी भावनाओं को हमेशा पवित्र रखना चाहिए। पूजा प्रार्थना, सत्संग, कथा श्रवण इत्यादि से भावनाओं को पवित्र रखने में सहायता मिलती है। पूतना की भावनाएं ठीक नहीं थीं, इसलिए श्रीकृष्ण ने उसका वध कर दिया। श्रीकृष्ण की प्रभुता की चर्चा करते हुए महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण संसार के सबसे बड़े वैरागी थे। वे कुशल संगीतज्ञ, कुशल वक्ता एवं नीतिवादी और न्यायवादी हैं। संवादई