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खाद पर सियासत: सपा, बसपा और किसान संगठन सरकार को घेरने में जुटे

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खाद पर सियासत : सरकार को घेरने में जुटे सपा, बसपा और किसान संगठन
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ललितपुर। लखीमपुर की घटना के बाद जनपद में खाद को लेकर किसानों का विरोध सरकार के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। खाद के मुद्दे पर हो रही सियासत में सपा और बसपा के अलावा किसान संगठन भी सरकार को घेरने में लगे हैं। बृहस्पतिवार को सपा के प्रदेश महासचिव ने मृत किसानों के परिजनों के घर जाकर कहा कि सपा सरकार बनने पर मृत किसान के परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिलाने का काम किया जाएगा।
खरीफ की फसल से बर्बाद हुए किसानों को बारिश होने से उम्मीद थी कि इस बार रबी की फसल ठीक होगी लेकिन बुवाई से पहले ही डीएपी की किल्लत ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। सुबह से लेकर रात तक खाद की दुकानों पर डेरा डाले किसानों का खाना पानी भी वितरण केंद्र पर हो रहा। वहीं महिलाएं भी चौका चूल्हा छोड़कर लाइन में लग गई थी। खाद के लिए लाइन में लगे किसान की मौत पर शासन ने भले ही दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता कर दी है लेकिन सपा व बसपा इस मामले को गर्माने में जुट गई।
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23 अक्तूबर को सपा पिछड़ा वर्ग के प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजपाल कश्यप और बृहस्पतिवार को प्रदेश महासचिव तिलकचंद्र अहिरवार ने मृत किसानों के घर जाकर पार्टी की ओर से शोक संवेदना जताते हुए कहा कि सरकार किसानों की दोगुनी आय का दावा कर रही है लेकिन खाद भी नहीं दिला पा रही। डॉ. राजपाल कश्यप ने इस मामले को सदन में उठाने की बात भी कही ।
भाकियू नेता राकेश टिकैत का आना स्थगित
ललितपुर। बसपा सुप्रीमो मायावती ने बुंदेलखंड में किसानों की मौत पर ट्वीट जारी कर पार्टी की मंशा जाहिर कर दी। जिलाध्यक्ष दयाराम अहिरवार ने कहा कि अन्नदाता की समस्या सुलझाना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है। इधर किसान संगठन भी धरना प्रदर्शन कर विरोध जता रहे हैं। शुक्रवार को भाकियू नेता राकेश टिकैत के तीन दिवसीय कार्यक्रम की भनक लगते ही प्रशासन अलर्ट हो गया लेकिन बृहस्पतिवार देर शाम उनके कार्यक्रम के निरस्त होने की जानकारी पर राहत महसूस की।
रबी की फसल बुवाई का लक्ष्य
कुल क्षेत्रफल 3,06,896 हेक्टेयर
गेहूं 1,72,384 हेक्टेयर
जौ 10,114 हेक्टेयर
चना 19,585 हेक्टेयर
मसूर 23496 हेक्टेयर
मटर 75,122 हेक्टेयर
सरसों 5,883 हेक्टेयर
तोरिया 172 हेक्टेयर
अलसी 135 हेक्टेयर
डीएपी की कुल जरूरत- 50 हजार मीट्रिक टन
ललितपुर। सपा के प्रदेश महासचिव व पूर्व एमएलसी तिलकचंद्र अहिरवार ने कहा कि भाजपा सरकार में किसानों का सर्वाधिक उत्पीड़न हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि डीजल के बढ़े दामों से जहां किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। वहीं, निजी क्षेत्र के इशारे पर की गई खाद की समस्या से किसान परेशान हैं। उन्होंने कहा कि खाद लेने के लिए लाइन में खड़े किसान की मौत होना निंदनीय है। सरकार किसानों का सबसे बड़ा हितैषी बताते हुए दोगुनी आय का दावा कर रही है लेकिन हकीकत यह है कि वह किसानों को खाद भी समय पर मुहैया नहीं करा पा रही। उन्होंने बृहस्पतिवार को पार्टी कार्यालय पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करने के बाद मृत किसानों के घरों पर जाकर परिजनों से मुलाकात की।
उन्होंने कहा कि बैंकों व साहूकारों से कर्जा लेकर अपने खेतों में फसल बुवाई करने के लिए खाद की उपलब्धता के लिए भटक रहे किसानों की सुध लेने वाला भी कोई नहीं है। ऐसे में पार्टी किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। कहा कि ग्राम मैलवारा खुर्द निवासी किसान सोनी अहिरवार ने फांसी लगाकर जान दी तो वहीं, थाना नाराहट क्षेत्र के ग्राम बनयाना निवासी महेश की हालत बिगड़ जाने से मौत हुई है।
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उन्होंने किसानों की असमय होने वाली इन मौतों का जिम्मेदार भाजपा सरकार व स्थानीय प्रशासन को ठहराते हुए कहा कि मृतक किसानों के बच्चों व उनके परिजनों का भरण-पोषण कौन करेगा, यह सरकार की चिंता का विषय होना चाहिए। लेकिन सरकार को किसानों की चिंता ही नहीं हैं। इससे पहले जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष फूलसिंह नन्ना के नेतृत्व में प्रदेश महासचिव का भव्यता से स्वागत किया। इस दौरान पूर्व विधायक रमेश कुशवाहा, ज्योति सिंह लोधी, प्रदीप कुशवाहा झांसी, अरविंद अहिरवार झांसी, स्वामी प्रसाद, जगदीश कंचन, जितेंद्र सिंह जीतू, खुशालचंद्र साहू, अशोक अहिरवार, अमर सिंह भैरा, मुन्ना लाल रजक, रामविलास रजक, शिल्पी रजक, गिरधारी सिंह, नेपाल सिंह, प्रीतम अहिरवार, गीता मिश्रा, सुरेंद्र गौतम आदि मौजूद रहे।
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