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नहीं मिली सौगात, निराशा लगी हाथ

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पाली। नगर पंचायत पाली को वर्ष 2019 से उम्मीद थी कि विकास के मामले में पाली को बड़ी सौगात मिलेगी, परंतु निराशा हाथ लगी। तीस बरस से चली आ रही अस्पताल की मांग अब भी जारी है। पार्क, अग्निशमन केंद्र, विज्ञान वर्ग का इंटर कॉलेज, नहर, हाट- बाजार स्थल सहित कई अन्य बुनियादी सुविधाएं अब तक पूरी नहीं हो सकी हैं।
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हे राम ! बड़े सस्ते में चली जाती है, पाली वासियों की जान। कुछ इसी अंदाज में पाली और आसपास के लोग अपनी सेहत के सुधार के लिए एक सुविधायुक्त अस्पताल के निर्माण के लिए रहनुमाओं की ओर टकटकी लगाए हैं । सूबे की सरकार बदली तो नई सरकार सत्ता में आई। लोगों ने स्थानीय विधायक व सांसद के समक्ष अपनी मांग रखी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। पूरा वर्ष वायदों की नुमाइंदगी ही देखने को मिली।
नगर पंचायत की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव तो पास होते रहते हैं, लेकिन इन्हें धरातल पर अमलीजामा पहनाने के लिए तैयारी नहीं दिखती। एक दशक पूर्व तत्कालीन नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार राही ने पाली के लोगों को पार्क और भुजरया तालाब में बोट क्लब का सपना दिखाया था। जिसका इंतजार अब भी लोगों के बीच बना है। पार्क न होने से लोग सुबह-शाम सड़कों पर सैर को निकलते हैं। घर में ही सिमटे नजर आते हैं। जिस भुजरया तालाब पर नगर पंचायत ने बोट क्लब का सपना दिखाया था, वह बरसात में जीर्णशीर्ण हो गया।
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सरकारी विद्यालय के तौर पर एकमात्र कलावर्ग से जिला परिषद इंटर कॉलेज है। इसमें विज्ञान वर्ग की मान्यता की मांग की जा रही है, लेकिन मांग पूरी नहीं हो रही। पाली में पान की खेती बड़े पैमाने पर होती है। घास फूस से तैयार इस खेती में प्राकृतिक आपदा के रूप में आगजनी से खतरा रहता है। आगजनी की घटनाओं पर काबू के लिए अग्निशमन केंद्र की मांग रखी। जमीन का अधिग्रहण हो गया, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं पाया। कस्बे की मुख्य सड़क पर साप्ताहिक हाट बाजार संचालित होता है, जिससे आवागमन बाधित होता। जाखलौन पंप कैनाल से पाली क्षेत्र में नहर की मांग चल रही है। पर, यह अभी मांगें ही हैं।
कहने भर को पाली तहसील मुख्यालय है, यहां की सुविधाएं अभी भी दशकों पीछे चल रही हैं। पर्यटन स्थलों से लेकर कस्बे का विकास भी उपेक्षित है। अस्पताल के अभाव में तो सभी परेशानी झेल रहे हैं। महिलाओं का तो और भी बुरा हाल होता है।
- कंचन मालवीय
वायदे हैं वायदों का क्या.. कुछ इसी तर्ज पर हमारे जनप्रतिनिधि भीड़ को देख उत्साहित होकर बड़े वायदे कर चले जाते हैं। इसको लोग हकीकत समझ आश्वासनों के झुनझुने थाम बरसों निकल देते हैं। पार्क, अस्पताल की कमी व श्री नीलकंठेश्वर मंदिर का पर्यटन के रूप में अब तक विकसित नहीं किया गया।
- रानू दुबे
पाली क्षेत्र विकास के मामले में बड़ा पिछड़ा है। गरीबों के बच्चों को पढ़ने के लिए विज्ञान वर्ग के इंटर कॉलेज की जरूरत है। कस्बे को हाट बाजार को आवश्यकता है। अस्पताल की मांग तो तीन दशक पूर्व से चली आ रही है, लेकिन धरातल पर अब तक हाथ कुछ नहीं लगा। - तिलक यादव
पाली का विकास जनप्रतिनिधियों के वायदों में ही उलझ कर रह गया है। यहां मूलभूत सुविधाओं के कार्य कम निजी तौर पर मुनाफे देने वाले कार्यों को ज्यादा तवज्जो दी जाती है। अब ऐसे कार्यो का होना जरूरी है जो आमजन की सेहत को फायदेमंद हों।
- बरखा चौरसिया
धरातल पर अस्पताल तो मिली नहीं, जो एंबुलेंस सुबिधा पाली प्रसव केंद्र से मिली थी उसको भी अब दूर कर दिया गया। जो पाली वासियो के साथ छलावा है। सपने बहुत देख चुके, जो प्रमुख मांगें हैं उन्हें वर्ष 2020 में धरातली रूप मिलना चाहिए। - प्रियंका जैन
आगजनी से पान किसानों को पीड़ा होती। आर्थिक हालात इतने खराब हो जाते कि पान किसानों को महानगरों की ओर पलायन होने पर मजबूर होना पड़ता है। अधिकृत जमीन पर जल्द अग्निशमन केंद्र की स्थापना हो। पान अनुसंधान केंद्र से भी किसानों को लाभ मिलना चाहिए।
- अरुण चौरसिया
अस्पताल के लिए जाखलौन मार्ग पर जमीन चिह्नित करा ली गई है। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग ने अब तक अधिग्रहण नहीं किया। इससे योजना में प्रस्तावित अस्पताल अब तक कस्बे को नहीं मिल पाया है। जो भी कमी है, उसे पूरा किए जाने का लगातार प्रयास चल रहा है।
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- रामकुमार चौरसिया, अध्यक्ष नगर पंचायत पाली।
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