संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। शहजाद नदी के तट पर करीब चार सौ साल पुराना मां ललितेश्वरी का मंदिर है। मान्यता है कि इसी मंदिर के नाम पर शहर का नाम ललितपुर पड़ा। इन्हें जनपद ललितपुर की कुल देवी माना जाता है। नवरात्र पर यहां प्रतिदिन भक्तों का तांता लगता है। पूरे नौ दिन यहां भक्त माता को जल अर्पण करने आते हैं।
मां ललितेश्वरी का मंदिर काफी प्राचीन है। ललितपुर की स्थापना से इसका इतिहास जोड़ा जाता है। मान्यता है कि करीब 400 साल पहले चबूतरा बनाकर माता की मूर्ति स्थापित की गई थी। उस समय यहां काफी घना जंगल था। आसपास के लोग ही यहां दर्शन करने आते थे। प्रत्येक भक्त की सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूर्ण होती है। मोहल्ला चौबयाना निवासी गोस्वामी परिवार मंदिर की पूजा करता रहा है। पुजारी उर्मिला गोस्वामी ने बताया कि 1969 में यहां काफी बड़ा यज्ञ कराया गया था। उसी समय मंदिर में कांच से सुंदरीकरण कराया गया। मंदिर प्रांगण में स्थित कुआं भी प्राचीन है। बाद में श्री हनुमानजी समेत अन्य मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा कर मढ़िया बनी। दूरदराज इलाकों से भक्तगण यहां आकर माता के दर्शन कर अपने को धन्य महसूस करते हैं। नवरात्रि में तो मंदिर की छटा देखते ही बनती है।
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भव्य तरीके से तैयार किया जा रहा मंदिर
ललितेश्वरी मंदिर पर विकास कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। मंदिर की भव्यता बढ़ाने के लिए निर्माण किए जा रहे हैं। साथ ही यहां आने वाले भक्तों की सुविधा का भी ध्यान रखा जा रहा है।
नवरात्र में प्रतिदिन होता है माता का नया शृंगार
नवरात्र में प्रतिदिन माता का नया शृंगार होता है। सुबह चार बजे से लोग माता को जल अर्पण करने आ जाते हैं। सुबह से रात्रि तक भक्तों का तांता लगा रहता है।