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जीवन में उपसर्ग से मिलता है उत्कर्ष: मुनिश्री

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मुनि श्री सुप्रभसागर - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। श्रमणरत्न मुनिश्री 108 सुप्रभ सागर महाराज ने जैनधर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण दिवस मुकुट सप्तमी को ऑनलाइन प्रवचन में कहा कि हर व्यक्ति उत्कर्ष तो चाहता है, पर उपसर्ग, कष्ट, संघर्ष, संकट से बचना चाहता है। बिना उपसर्ग, बिना संघर्ष, बिना चैलेंज के जीवन में उत्कर्ष संभव नहीं। जो उपसर्ग और चुनौतियों को समता से सहन करता है, वह भगवान भी बन जाता है। श्रावण शुक्ल सप्तमी को तीर्थंकर पार्श्वनाथ ने मोक्ष प्राप्त किया था।
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गोशाला मसौरा में ऑनलाइन प्रवचन में उन्होंने कहा कि मरुभूति के जीव ने दस भव तक अपने सगे भाई कमठ का उपसर्ग सहन किया, वह मरुभूति आगे जाकर तीर्थंकर पार्श्वनाथ बन गए। पार्श्वनाथ ने दिगंबर भेष धारण किया और समतापूर्ण भावों से उपसर्ग सहन किया। वह श्रावण शुक्ल सप्तमी का दिन था, जब तीर्थंकर पार्श्वनाथ ने मोक्ष प्राप्त किया। इसलिए जैन परंपरा में आज मुकुट सप्तमी यानि मोक्ष सप्तमी श्रद्धा और आस्था से मनाई जाती है।
मुनिश्री ने कहा कि पार्श्वनाथ भगवान के जीवन से सभी को शिक्षा लेकर उनके पदचिह्नों पर चलना चाहिए। जैनधर्म में भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण महोत्सव को मुकुट सप्तमी (मोक्ष सप्तमी) के रूप में मनाए जाने की परंपरा है। जैन मंदिरों में विशेष अभिषेक, शांतिधारा, पार्श्वनाथ पूजन और पार्श्वनाथ भगवान को निर्वाण लाडू चढ़ाया जाता है। महिलाएं उपवास रखती हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन होते हैं, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के कारण श्रद्धालुओं ने घर पर ही धार्मिक क्रियाएं, व्रत, उपवास और विधान किए।
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ऑनलाइन समाधान शुरू
जीवन की आपाधापी में उठते अनेक विकल्पों से व्यथित व्यक्ति के मन को शांत करने के लिए समीचीन विकल्पों का सम्यक समाधान मुनिश्री सुप्रभसागर द्वारा ऑनलाइन किया जा रहा है। इसका शुभारंभ मुकुट सप्तमी से ‘सुप्रभ उवाच’ यूट्यूब चैनल पर शुरू हो गया है। ऑनलाइन प्रश्न संघस्थ मुनिश्री प्रणत सागर ने पूछे। ऑनलाइन समाधान का संचालन डॉ. सुनील संचय ने किया। बताया कि मुनिश्री सुप्रभ सागर प्रतिदिन शाम 5.13 बजे जैन दर्शन के गूढ़ रहस्यों का ऑनलाइन समाधान करेंगे।
भगवान पार्श्वनाथ स्वामी का मोक्ष कल्याणक मनाया
ललितपुर। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को जैनधर्म के तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का जन्म-तप कल्याणक एवं सप्तमी को भगवान पार्श्वनाथ स्वामी का मोक्ष कल्याणक मनाया गया।
विश्व शांति की मंगल भावना के साथ सुबह घर के द्वारों पर रंगोली सजाई गई। धर्म ध्वजा स्थापित कर भक्तामर स्त्रोत, सुप्रभात स्त्रोत का पाठ, नमस्कार मंत्र का जाप, मंगल कलश की स्थापना कर पूजन विधान किया गया। इसके अलावा भगवान नेमिनाथ स्वामी के जन्म एवं तप कल्याणक और मोक्ष सप्तमी की खुशियां मनाई गईं। इस दौरान अहिंसा सेवा संगठन द्वारा आयोजित की गई ऑनलाइन प्रतियोगिता के के प्रतिभागियों को ई- सर्टिफिकेट प्रदान किए गए। संगठन के संस्थापक विशाल जैन पवा ने बताया कि ऑनलाइन प्रतियोगिता के सभी 107 प्रतिभागियों को व्हाट्सएप के माध्यम से ई-सर्टिफिकेट प्रदान किए गए। इस मौके पर राजेश कुमार जैन, जितेंद्र कुमार जैन, आरजू जैन, अंकित चौधरी, बृजेश जैन शास्त्री, अभिषेक मोना, सोनाली जैन, आशा जैन, अभिषेक पाह, ज्योति जैन, किरन जैन आदि मौजूद रहे।
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