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मनरेगा घोटाले में बीडीओ के निलंबन की संस्तुति

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ललितपुर। ग्राम झरकौन मनरेगा घोटाले में खंड विकास अधिकारी बिरधा आलोक कुमार के निलंबन की संस्तुति की गई है, साथ ही ग्राम प्रधान सहित अन्य चार कर्मचारियों पर रिपोर्ट दर्ज कर तीन दिन में अवगत कराने के आदेश दिए हैं।
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डीएम अन्नावि दिनेशकुमार द्वारा विकासखंड बिरधा अंतर्गत ग्राम झरकौन में मनरेगा योजना के तहत कराए जा रहे कार्यो का औचक निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के समय रवींद्र वीर यादव उपायुक्त (श्रम रोजगार),खंड विकास अधिकारी बिरधा आलोक कुमार, उमेश झा जिला अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, निहाल सिंह ग्राम रोजगार सेवक, जगदीश सिंह ग्राम प्रधान, नरेंद्र सिंह ग्राम पंचायत अधिकारी एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे। ग्राम झरकौन में मनरेगा के अंतर्गत विभिन्न स्थलों पर कई कमियां पाई गई। इसमें रमेश के खेत से नाले वाले सफाई का कार्य का स्थलीय निरीक्षण किया। मौके पर 28 मजदूर कार्य करने हेतु पाए गए। तकनीकी सहायक द्वारा जनरेट करके मस्टररोल में 42 व्यक्तियों का अंकन पाया गया। मौके पर कार्य करने वाले उपरोक्त 28 व्यक्तियों में से कई व्यक्तियों का अंकन नहीं पाया गया। इस मस्टररोल पर एपीओ मनरेगा के हस्ताक्षर पाए गए। पक्की सड़क से तालाब की ओर नाला सफाई का कार्य का स्थलीय निरीक्षण किया। इस कार्य में 20 मजदूरों को लगाने बात की जानकारी की गई लेकिन मौके पर केवल 14 मजदूर कार्य करते हुए पाए गए। खिरकन से राम सिंह के मकान तक करीब 500 मीटर तक सड़क का निर्माण कार्य बगैर प्रस्ताव ग्राम प्रधान द्वारा जेसीबी मशीन से कराया गया है। इस सड़क के दौरान खेतों में करीब चार फुट की गहराई में खोदकर मिट्टी निकाली गई है। बीडीओ ने बताया कि उक्त सड़क का प्रस्ताव ग्रामसभा द्वारा पास भी नहीं कराया गया है। अनियमित रूप से ग्राम प्रधान द्वारा जेसीबी मशीन से खुदाई कर सड़क पर मिट्टी डाली गई है। डीएम ने उपरोक्त अनियमितताओं को दृष्टिगत रखते हुए कर्मचारियों/अधिकारियों एवं ग्राम प्रधान के खिलाफ कार्रवाई करने हेतु संबंधित अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं।
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यह तथ्य आए सामने
उपायुक्त मनरेगा द्वारा उपलब्ध कराए गए मस्टररोल की छाया प्रति व एमबी की छाया प्रति का अवलोकन किया गया। 18 व्यक्तियों के नाम मस्टररोल में दर्ज पाए गए एवं 10 व्यक्तियों के नाम मस्टररोल में अंकित नहीं पाए गए। इसके अतिरिक्त नौ व्यक्तियों की रोजगार सेवक द्वारा फर्जी हाजिरी अंकित कर भुगतान कराया गया है। जिस पर ग्राम पंचायत सचिव के हस्ताक्षर नहीं हैं। इस प्रकार कुल 1,27,908.00 रू0 (एक लाख सत्ताइस हजार नौ सौ आठ रूपये मात्र) का भुगतान किया गया है जो विधि विरुद्ध एवं अनुचित है। उक्त मस्टररोल पर नरेंद्र सिंह ग्राम पंचायत अधिकारी झरकौन के हस्ताक्षर नहीं हैं, इसलिए इस प्रकरण में उन्हें उत्तरदायी माना जाना उचित है। इसके अलावा अनियमितता के लिए प्रथम दृष्टया बिरधा ब्लॉक के बीडीओ आलोक कुमार, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी उपेंद्र शर्मा, रोजगार सेवक ग्राम झरकौन निहाल सिंह, जगदीश सिंह ग्राम प्रधान उत्तरदायी हैं।
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बगैर प्रस्ताव के किया कार्य प्रारंभ
बगैर प्रस्ताव के कार्य कराया जाना अनुचित है। महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना में दी गई व्यवस्था के प्रतिकूल है। उपरोक्त अनियमितता के लिए ग्राम प्रधान एवं क्षेत्रीय कर्मचारी उत्तरदायी हैं। इस पर डीएम ने उत्तर प्रदेश पंचायत राज एक्ट 1947 की धारा 95 (छ) में दी गयी व्यवस्था के तहत ग्राम प्रधान झरकौन जगदीश सिंह को पदच्युत किए जाने हेतु कार्रवाई किए जाने/प्रस्ताव बनाकर प्रस्तुत करने के निर्देश जिला पंचायत राज अधिकारी को निर्देशित किया है।
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