ललितपुर। कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत एक मोहल्ले में मूूक बधिर से खेत में दुष्कर्म करने के तीन वर्ष पुराने मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र अधिनियम) निर्भय प्रकाश की अदालत ने दोष सिद्ध होने पर दोषी को आजीवन कारावास एवं तीस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता राकेश तिवारी के मुताबिक तीन वर्ष पहले 27 सितंबर 2018 को कोतवाली क्षेत्र के एक मोहल्ला निवासी व्यक्ति ने कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि 26 सितंबर 2018 की रात्रि लगभग ग्यारह बजे जब उसकी अठारह वर्षीय बहन अपने घर के पीछे खेतों में शौच के लिए गई थी, तभी वहां भरत आया और उसकी बहन को अकेला पाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। जब बहन के चिल्लाने की आवाज सुनकर वह दौड़कर मौके पर पहुंचा, तब भरत ने उसे पुलिस में शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी भी दी और मौके से भाग गया। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने भाई की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी को को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था और इस मामले में आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए गए। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था। बृहस्पतिवार को न्यायाधीश निर्भय प्रकाश की अदालत ने उक्त मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए अपराधी भरत रैकवार को मूक बधिर युवती से दुुष्कर्म का दोष सिद्ध होने पर आजीवन कारावास एवं कुल तीस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
तीन द्विभाषी विशेषज्ञों के माध्यम से कराए गए थे युवती के बयान
दुष्कर्म पीड़िता युवती के मूक बधिर होने के चलते न्यायालय और शासकीय अधिवक्ता ने अलग से बीएसए विभाग की ओर से संचालित श्रवण वाद्य केंद्र से तीन एक्टसपर्ट (एक महिला व दो पुुरुष द्विभाषी विशेषज्ञ) बुलाकर उसके न्यायालय में बयान कराए थे। इसमें कुल नौ गवाहों के बयान कराए गए थे।