तालबेहट। बुंदेलखंड के चप्पे-चप्पे में वीरता के साथ-साथ अलौकिक और अतिदुर्लभ प्रतिमाओं का इतिहास भरा पड़ा है, जो अतीत की कला और कौशल के साथ-साथ चमत्कारिकता को बयां करता है। इन्हीं में से एक नगर का हजारिया महादेव शिव मंदिर है। जो अपने बढ़ते आकार के कारण क्षेत्र में आस्था का केंद्र है। इसे ईश्वरीय चमत्कार मानकर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है।
झांसी-ललितपुर के मध्य सन 1857 की क्रांति के अग्रदूत महाराजा मर्दन सिंह के भारतगढ़ दुर्ग और लगभग छह वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में मानसरोवर झील है। इसी के समीप दो चमत्कारिक शिवलिंग हैं। जो हजारिया महादेव मंदिर बाहर कोट और भीतर कोट के नाम से जाने जाते हैं। दोनों शिवलिंगों का आकार दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। बताया जाता है कि दोनों शिवलिंगों की स्थापना 1936 में तालबेहट नगर के एक शिवभक्त हरिदास तिवारी ने कराई थी। इन शिवलिंगों का आकार एक सा है और दोनों एक ही किस्म के पत्थर से बने है। इनका व्यास छह फीट छह इंच और जमीन से जलहरी की ऊंचाई लगभग दो फिट पांच इंच है।
प्रत्येक शिवलिंग की पिंडी पर छोटे- छोटे शिवलिंगों के ग्यारह चक्र बने हैं, जिसके प्रत्येक फेरे में 108 शिवलिंग हैं। शिवलिंग के बाहर जलहरी के सामने बने नंदी के ऊपर उभरी कलाकृतियां आज भी उस समय की कलाकारी और कलाकारों के हुनर का अंदाज बयां करने के लिए काफी हैं।
इन शिवलिंगों का बढ़ता आकार पूरे क्षेत्र में भगवान के चमत्कारिक स्वरूप की दृष्टि से देखा जाता है। कुछ वैज्ञानिक सोच रखने वाले लोगों का मानना है कि कुछ पत्थरों के पानी के समीप रहने से उनमें फैलाव होता है। यह शिवलिंग भी उन्हीं पत्थरों से निर्मित होंगे। परंतु, यहां हर समय श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
कई नेता और अधिकारी यहां दर्शन करने आए, परंतु इसके विकास की कोई व्यापक योजना आज तक नहीं बन सकी। पांच जून 1968 को भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ दिवगंत नेता विजयाराजे संधिया ने जब शिवलिंग के दर्शन किए थे तो उन्होंने कहा था कि विश्व में ऐसा अनूठा शिवलिंग उन्होंने नहीं देखा।
- राजेश कुमार त्रिपाठी, इतिहासकार श्रवण त्रिपाठी के बेटे
बचपन से में इस मंदिर पर आ रहा हूं। पहले हम लोग मंदिर में शिवलिंग की परिक्रमा आसानी से कर लेते थे, परंतु अब परिक्रमा का मार्ग पूरी तरह से बंद हो गया है। जो अपने आप में भगवान शिवजी का चमत्कार है।
- शंकरदयाल चतुर्वेदी, सेवानिवृत्त प्रवक्ता
शिवजी का मंदिर और मानसरोवर झील लोगों को शांति प्रदान करने का सबसे अच्छा स्थान है। परंतु प्रशासनिक उपेक्षा के चलते दोनों स्थलों का विकास अवरुद्ध है। इसके लिए किसी भी जनप्रतिनिधि ने कोई खास ध्यान नहीं दिया।
- संतोष कुमार उपाध्याय, आचार्य
मंदिर पर आए दिन शिवार्चन होते रहते हैं। श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, जिससे हर समय यहां श्रद्धालु आते रहते हैं। इस स्थान को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए प्रशासन को व्यापक योजना बनानी चाहिए।
- शिव कुमार पुरोहित, शास्त्री