महरौनी। आर्यिका रत्न विज्ञान मति माताजी ने कहा कि जैन धर्म के अनुसार जिसका मोक्ष हो जाता है, उसका मनुष्य भव में जन्म लेना सार्थक हो जाता है। विनय ही मोक्ष का द्वार है प्रभु का स्पर्श तो स्वर्ण ही नहीं पारस बना देता है, हमें भी पार्श्व प्रभु की तरह अपने भवो को कम करके निर्वाण प्राप्ति की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने सोमवार को भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव में धर्म सभा को संबोधित कर रहीं थी।
श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन 23 वे तीर्थकर भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक मनाया जाता है। नगर में मोक्ष सप्तमी पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आर्यिका रत्न विज्ञान मति माताजी संसघ के सानिध्य में हुए। प्रात: काल भगवान जिनेंद्र का जलाभिषेक किया गया। साथ ही शांतिधारा कर सर्वजन सुखाय की कामना की। आर्यिका संघ के पावन सानिध्य में सम्मेद शिखर विधान किया गया। मंडल की स्थापना श्रीनिवास कठरया ने की। मंडल पर सम्मेद शिखर की सभी टोंको के साथ तलहटी के मंदिर के साथ 80 अर्घ समर्पित किए। भगवान पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक महोत्सव में निर्वाणलाढू भाव भक्ति के साथ समर्पित किया गया। विधान में द्रव्य का अवसर प्रशांत सिंघई बंटी को मिला। श्री सर्वतोभद्र अतिशय तीर्थ क्षेत्र में भी मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ का अभिषेक किया गया और निर्वाण लाढू समर्पित किए। मोक्ष सप्तमी पर जैन समाज की बालिकाओं ने सामूहिक रूप से उपवास रखा। कार्यक्रम में धार्मिक अनुष्ठान शुभम शास्त्री बड़ा मलहरा द्वारा कराए गए।
प्रवचन करती माता- फोटो : LALITPUR