ललितपुर। बीते रोज मुहल्ला पिसनारी में एक छत से निकली हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से एक छात्र की मौत हो गई थी। ऐसा खतरा अन्य मुहल्लों में भी बना हुआ है। रेलवे स्टेशन के दूसरी ओर मुहल्ला जुगपुरा में भी हाइटेंशन लाइन दर्जनों मकानों के ऊपर से निकली हुई है, जहां हर रोज मौत के डर के साये में लोग रहने को मजबूर हैं। कुछ वर्षों पूर्व पूर्व में यहां हाइटेंशन लाइन की चपेट में आने से एक महिला की मौत हो गई थी, जबकि अलग-अलग घटनाओं में कई लोग झुलस चुके हैं। इसके बाद भी शहर का यह मुहल्ला हाइटेंशन लाइन के खतरे के नीचे बसने से हर पल मौत की दहशत में है।
शहर के कई मुहल्लों में हाइटेंशन लाइन व मकानों का निर्माण व्यवस्थित तरीके से नहीं होने के कारण आज सैकड़ों जिंदगियां मौत के नीचे बस रही हैं। यहां सिद्घन बाईपास रोड क्रॉस करते ही कई मकानों के की छतों पर हाइटेंशन लाइन का यह
जाल बिछा हुआ है। इन लाइन के नीचे मकान तो बन गए हैं, लेकिन मुहल्ले में कई बार पूर्व में हाइटेंशन करंट की चपेट में आने से कुछ वर्षों पूर्व जहां एक महिला की मौत हो गई थी और इस हादसे में एक बच्चा भी झुलस गया था। इसी प्रकार अन्य अलग-अलग हादसों में इन हाइटेंशन लाइनों के करंट की चपेट में आने से कई लोग झुलसकर घायल हो चुके हैं। यही नहीं सात वर्ष पूर्व तो एक मकान में हाइटेंशन तार सरिया से छू जाने से पूरे मकान में आग तक लग गई थी, जिसके चलते मकान में रखा कई कुुंतल गेहूं भी जलकर राख हो गया था, जबकि सिंचाई को रखे पाइप भी जल गए थे और मकान में भी कई जगह दरारें आ गई थीं। हालांकि, उस समय इस हादसे में जनहानि होने से बच गई थी। इन तमाम हादसों के बाद भी जिला प्रशासन, जन प्रतिनिधि और बिजली विभाग भी लाइन हटाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सका है। जबकि, मुहल्लेवासियों द्वारा पूर्व में कई बार अधिकारियों को ज्ञापन दिए हैं।
छत पर जाने को बच्चों को रोकने के किए इंतजाम
मुहल्ला जुगपुरा में मकानों की छत से निकली हाइटेंशन लाइन की वजह से पूर्व में हो चुके हादसे के चलते स्थानीय लोगों ने अपने बच्चों व महिलाओं को छत पर जाने से रोकने के लिए किसी ने सीढ़ियों के रास्ते में दरवाजा लगाकर ताला जड़ा हुआ है, तो किसी ने हाइटेंशन लाइनों की ओर दीवार बना दी है, ताकि बच्चे या महिलाएं हाइटेंशन तारों के पास में न जा सकें। हालांकि, कई बार इतनी रोक के बाद भी हाइटेंशन तार टूटकर छतों पर गिर जाते हैं और ऐसे में कई बार मकानों में भी करंट आने लगता है।
तार को ऊंचा करने को बांधी बल्लियां
मकानों की छत से निकली हाइटेंशन लाइन के खतरे से कुछ हद तक बचने के लिए लोगों ने अपनी छतों पर बल्लियों से तारों को बांधकर ऊंचा किया गया है, ताकि यदि कोई गलती से तारों के पास पहुंच भी जाए तो कुछ बचाव तो हो सके।
मकान तो पक्का हुआ, लेकिन खतरा नहीं टला
पहले कच्चे मकान में रहते थे, लेकिन अब पीएम आवास बन जाने से मकान पक्का हो गया है। लेकिन, कच्चे मकान के ऊपर से भी हाइटेंशन लाइन पहले भी निकली थी और अब पक्के मकान की छत से भी निकली है। छत पर तार नहीं छुएं, इसलिए बल्लियों के सहारे लाइन को ऊंचा किया गया है। हर समय तार टूटने का खतरा बना रहता है।
-लखन सहरिया, स्थानीय नागरिक।
बारिश में करंट आता है, तो डर लगता है
मकानों की छतों पर से निकली हाइटेंशन हटाने के लिए मुहल्लेवासियों के साथ कई बार अधिकारियों को ज्ञापन दिए और विधायक से भी मिले, लेकिन अब तक लाइन नहीं हटाई गई है। कुछ वर्ष पहले यहां मुहल्ले में हाइटेंशन करंट की चपेट में आने से एक महिला की मौत भी हो गई थी, जबकि एक बच्चा झुलस गया था। इसके अलावा भी कई लोग हाइटेंशन तार की चपेट में आने से आहत हो चुके हैं। बारिश में दीवारों में करंट आता है, तब डर लगता है कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए।
-धर्मेंद्र साहू, नागरिक, जुगपुरा।
लाइन के नीचे सैकड़ों घर बस गए
इस मुहल्ले में जुगपुरा में हाइटेंशन लाइन के नीचे सैकड़ों घर हैं और उनमें लोग डर के साये में रह रहे हैं। लाइन हटाने के लिए पूर्व में दर्जनों बार अधिकारियों को ज्ञापन दिए हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं है। लाइन नहीं हटती है तो गंभीर हादसा होने का खतरा बना हुआ है। लाइन हटाई जाना बहुत आवश्यक है और यदि नहीं हटाई गई तो कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है।
-राकेश साहू, नागरिक जुगपुरा।
हाइटेंशन लाइन पहले से बनी हुई है और मकान बाद में बने हैं। हाइटेंशन लाइन हटाने की विभागीय प्रक्रिया है, इसमें स्टीमेट की राशि मिलने के बाद भी विभाग दूसरी जगह होने पर हाइटेंशन लाइन शिफ्ट कर सकता है। उच्चाधिकारियों को समस्या के बारे में अवगत कराया है।
शैलेंद्र कुमार कटियार, अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम।