ललितपुर। शहर में नदीपुरा स्थित शहजाद नदी और तालबेहट क्षेत्र में पारौन-हजारिया में शहजाद नदी के पुलों के निर्माण के निर्माण के लिए अभी बजट का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि सेतु निगम ने दोनों पुुलों का स्टीमेट बनाकर शासन को भेजा है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने जून माह में झांसी में हुए एक कार्यक्रम में इन दोनों पुलों के नवनिर्माण की घोषणा की थी, लेकिन तीन माह में सिर्फ स्टीमेट बनाकर मुख्यालय भेजने की प्रक्रिया ही हो सकी है। इसे लेकर लोग परेशान हैं।
शहर में ब्रिटिश हुकूमत में बना शहजाद नदी का पुल काफी जर्जर और संकरा होने के चलते राहगीरों को निकलने में दिक्कत होती है। पुल की रेलिंग व किनारे लगे पोल तक टूट गए हैं। जिससे यहां अक्सर दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। पुल पर आए दिन घंटों लगने वाले जाम से लोग परेशान होते हैं। बारिश के दिनों में गोविंद सागर बांध के गेट खुलने पर अक्सर इस पुल के ऊपर से तीन से चार फुट पानी बहता है, इस कारण कई बार दो से तीन दिनों तक इस पुल से आवागमन तक बंद हो जाता है।
ऐसी स्थिति में यहां से निकलने वाले राहगीरों को तीन किलोमीटर पीछे जाकर बाईपास पहुंचकर करीब पांच किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ता है। तब जाकर वह दूसरी ओर पहुंच पाते हैं। यह स्थिति बारिश के दिनों में हर वर्ष होती है, जिसके चलते स्थानीय लोग व विभिन्न राजनीतिक एवं स्वयंसेवी संगठनों द्वारा वर्षों से इस पुल के चौड़ीकरण के साथ ही नवनिर्माण की मांग की जा रही है। डिप्टी सीएम की घोषणा के बाद अब इन पुलों का सर्वे होने के बाद सेतु निगम द्वारा स्टीमेट बनाकर मुख्यालय भेजा गया है। पुलों के निर्माण के लिए सेतु निगम को बजट का इंतजार है, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू होने की नींव रखी जाएगी। फिलहाल अभी तो यहां लोगों को जर्जर व संकरे पुल से होकर परेशानियों के बीच निकलना पड़ रहा है।
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दस साल से क्षतिग्रस्त पड़ा पुल
तालबेहट। पूराकलां से पारौन होते हुए बार को जोड़ने वाले मार्ग पर हजारिया और सारसेड़ के मध्य शहजाद नदी का क्षतिग्रस्त पुल का रपटा करीब दस वर्ष पहले नदी में आए पानी के तेज प्रवाह में बह गया था। जिससे लोगों का इस मार्ग से आना जाना बंद सा हो गया था। पूराकलां से बार को जाने के लिए दो रास्ते हैं। एक रास्ता हसारकलां भुचेरा से होता हुआ बार को जाता है और दूसरा रास्ता हजारिया सारसेड़ से पारौन होता हुआ बार को जाता है। क्षेत्र के लोग इसी रास्ते का उपयोग करते थे। पुल के क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीण नदी सूखने पर ही दो पहिया वाहनों से इस मार्ग से लोग निकल पाते हैं।
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इस पुल के निर्माण से क्षेत्र की जनता को आवागमन में काफी आसानी होगी। इसके लिए कई बार अधिकारियों को अवगत कराया। पुल निर्माण होने से लोगों को काफी राहत मिल जाएगी। स्वामी प्रसाद, पूर्व जिला पंचायत सदस्य पूराकलां क्षेत्र
इस पुल के निर्माण से धमना, सारसेड, हजारिया, बघौरा, ककरेला, नयाखेड़ा, रजपुरा खैरा, बटवाहा, लड़वारी आदि गांव सहित लगभग 30 गांव के लोगों को आवागमन में राहत मिलेगी। मान सिंह, पूर्व जिला पंचायत सदस्य पूराकलां
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ललितपुर के शहजाद नदी के पुल और पारौन-हजारिया के पुल के निर्माण के लिए मुख्यालय स्टीमेट बनाकर भेजा गया है। स्टीमेट पास होने और बजट मिलने के बाद कार्य शुरू कराया जाएगा।
-वेदप्रकाश, डीपीएम।
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कैप्सन- हजारिया सारसेड़ के मध्य शहजॉद नदी का क्षतिग्रस्त पुल- फोटो : TALDEHATE