ललितपुर। जिला अस्पताल में लाखों रुपये की लागत से बनाई गई बर्न यूनिट नर्सिंग स्टाफ के अभाव में तालाबंदी का शिकार है। आग से जले मरीजों का इलाज सर्जिकल वार्ड में पुराने ढर्रे पर किया जा रहा है। गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर करके इतिश्री की जा रही है।
आग से जले मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही सभी आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से जिला अस्पताल स्थित आपरेशन थियेटर के सामने लाखों रुपये खर्च करके बर्न यूनिट बनाई गई थी, जिसमें जले हुए मरीजों की आवश्यकता को देखते हुए लैट्रिन-बाथरूम से अटैच पांच वार्ड बनाए गए। चिकित्सीय स्टाफ कक्ष के अलावा एक बड़ा हॉल भी बनाया गया। लेकिन, तीन वर्ष बीतने के बाद भी नवनिर्मित बर्न यूनिट को क्रियाशील नहीं बनाया गया है। आग से जले मरीजों का इलाज सर्जिकल वार्ड में पुराने ढर्रे पर किया जा रहा है। जिला अस्पताल के ही चिकित्सकों का मानना है कि जले हुए रोगियों की मौत का सबसे बड़ा कारण संक्रमण है। उनका मानना है कि आग से जले रोगियों को ऐसे पृथक कक्ष में रखा जाना चाहिए, जहां धूल भी प्रवेश नहीं कर सके। इसके अलावा कक्ष को ठंडा रखने के लिए एसी और कूलर की व्यवस्थाएं होनी चाहिए, लेकिन जले हुए रोगियों के वार्ड में अधिकांश सुविधाएं नदारद हैं। एसी की बात तो दूर प्रचंड गर्मी में जले हुए रोगियों को एक अदद कूलर की व्यवस्था नहीं है।
अस्पताल की ओर से महज मच्छरदानी ही मुहैया कराई जाती है। जले हुए रोगियों के वार्ड में सामान्य रोगी भी लिटाए जा रहे हैं, जिनके तीमारदार जूते-चप्पल आदि पहनकर वार्ड में चहलकदमी कर संक्रमण फैलाते हैं। इतना ही नहीं, सर्जिकल वार्ड से शौचालय भी दूर है। इन हालातों में जले हुए रोगियों का समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है।
वहीं, चिकित्सा प्रशासन का कहना है कि नर्सिंग स्टाफ की कमी की वजह से नई बर्न यूनिट क्रियाशील नहीं हो पा रही है, क्योंकि जले हुए रोगियों को सबसे अधिक देखभाल की आवश्यकता पड़ती है। इसी कमी के कारण बर्न यूनिट क्रियाशील नहीं हो पा रही है। इस संबंध में शासन और प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है।
यह हैं नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता
जिला अस्पताल में दो सहायक मैट्रन, 14 सिस्टर और 32 स्टाफ नर्सों के पद रिक्त चल रहे हैं। अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ के 55 पद स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष यहां महज एक सिस्टर और पांच स्टाफ नर्स उपलब्ध हैं, जिन पर पूरी अस्पताल की देखरेख का जिम्मा है।