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Lalitpur News: ग्रेनाइट कारोबार सिमटा, खदानों के साथ रोजगार भी घटे

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संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। जिले में ग्रेनाइट खनन का कारोबार पिछले एक दशक में लगातार सिमटता गया है। 25 से घटकर 15 खदानें ही संचालित रह जाने से न केवल खनन उद्योग प्रभावित हुआ है, बल्कि इससे जुड़े सैकड़ों रोजगार के अवसर भी कम हुए हैं। निजी भूमि के पट्टों की अवधि समाप्त होने और उनका नवीनीकरण न होने से कारोबार पर असर पड़ा है, वहीं खनन विभाग का मासिक राजस्व भी 70-75 लाख रुपये से घटकर 15-20 लाख रुपये रह गया है।
करीब दस वर्ष पहले जिले की 25 ग्रेनाइट खदानों से खनन विभाग को प्रतिमाह 70 से 75 लाख रुपये का राजस्व मिलता था। वर्तमान में 15 खदानों से केवल 15 से 20 लाख रुपये प्रतिमाह का राजस्व प्राप्त हो रहा है।
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ललितपुर में रॉक फॉस्फेट, लौह अयस्क, ग्रेनाइट, इमारती पत्थर, बालू, खंडा और मौरंग सहित कई खनिज उपलब्ध हैं। इसके बावजूद वर्तमान में मुख्य रूप से मौरंग, इमारती पत्थर और ग्रेनाइट का ही खनन हो रहा है। अधिकारियों के अनुसार रॉयल्टी दरों में वृद्धि, निजी भूमि पर पट्टों का नवीनीकरण न हो पाना और निवेशकों की घटती रुचि के कारण ग्रेनाइट खनन लगातार प्रभावित हुआ है।
खनन कारोबार में आई इस गिरावट का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। खदानों के बंद होने से परिवहन, मशीनरी संचालन और मजदूरी जैसे सहायक व्यवसाय भी प्रभावित हुए हैं।


रोजगार पर भी पड़ा असर
ग्रेनाइट खदानों के बंद होने से बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार प्रभावित हुआ है। प्रत्येक खदान से खनन, कटिंग, लोडिंग, मशीन संचालन और परिवहन सहित कई लोगों को रोजगार मिलता था। खदानें बंद होने के बाद मजदूरों, ट्रैक्टर-डंपर संचालकों और पत्थर प्रसंस्करण से जुड़े कारोबारियों के सामने काम का संकट गहराया है। कई श्रमिकों को दूसरे जिलों या राज्यों में रोजगार तलाशना पड़ रहा है।
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ग्रेनाइट की अधिकांश खदानें निजी भूमि पर संचालित थीं। पट्टा अवधि समाप्त होने के बाद रॉयल्टी दरें बढ़ने से लोगों ने दोबारा पट्टा लेने में रुचि नहीं दिखाई। इसी वजह से खदानों की संख्या कम हुई है। - गोपाल कृष्ण दत्ता, खनिज अधिकारी
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