ललितपुर। नगर पालिका परिषद अध्यक्ष ने शनिवार को होने वाली बोर्ड की बैठक अचानक स्थगित कर दी। इसकी जानकारी मिलते ही सभासद भड़क गए। सभासदों ने पालिकाध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सभासद उन पर मनमानी का आरोप लगाते हुए समाधान दिवस पर तहसील पहुंच गए। वहां पर पालिकाध्यक्ष की शिकायत अधिकारियों से की। पालिका में की जा रहीं गड़बड़ियों की जांच करवाने की भी मांग की।
नगर पालिका ने नगर क्षेत्र में मूल भूत सुविधाओं व अन्य समस्याओं के निस्तारण और विकास कार्यों के लिए बोर्ड बैठक बुलाई थी। बैठक में विकास कार्यों के प्रस्ताव बोर्ड के समक्ष रखे जाते। शहर का विकास नपा अध्यक्ष व सभासदों की तकरार की भेंट चढ़ गया है। दोनों के बीच चल रहे मनमुटाव से लंबे समय से बैठक नहीं हो पा रही है। लगभग छह माह बाद 29 नवंबर को बैठक हुई थी, जिसमें बोर्ड बैठक की वार्ता के दौरान एक दूसरे पर आरोप लगाए गए जिसके बाद पालिका ध्यक्ष रजनी साहू ने बैठक को स्थगित कर चार दिसंबर को आयोजित करने का निर्देश दिया था लेकिन शनिवार को भी बोर्ड बैठक नहीं हो सकी। बैठक को लेकर सभासदों ने बताया कि सुबह सभागार में पहुंचे, जहां पर न तो अध्यक्ष और न ही अधिशासी अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
खींचतान से नगर का विकास भी थमा
पूर्व की नगर पालिका की बोर्ड बैठक में अध्यक्ष और सभासदों के मध्य प्रस्ताव स्वीकृत हुआ था कि अध्यक्ष द्वारा पंद्रह हजार रुपये तक का भुगतान किया जा सकेगा। इससे अधिक का भुगतान होने पर बोर्ड के समक्ष प्रस्ताव रखा जाएगा, लेकिन नगर पालिका द्वारा दस लाख रुपये का भुगतान हैंडपंप की मरम्मत के लिए बिना बोर्ड बैठक की स्वीकृति के कर दिया गया। इसके चलते सभासद नाराज चल रहे हैं और हर बार बोर्ड बैठक में विवाद की स्थिति बन जाती है, जिससे बोर्ड बैठक टल जा रही है। वहीं सभासदों की सहमति पर बहुमत से कमेटियों का गठन भी हुआ था, जिस पर अध्यक्ष ने कमेटियों के क्रियान्वयन पर प्रशासन को पत्र लिखा था। इसे लेकर भी विवाद चल रहा है। जबकि बारह करोड़ रुपये विकास की मद में नगर पालिका के पास उपलब्ध हैं, जो खर्च नहीं पा रहे हैं और पालिकाध्यक्ष व सभासदों की खींचतान में विकास भी थमा हुआ है।
विकास कार्यों में मनमानी का आरोप
सभासदों ने जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में बताया कि नगर पालिका में मनमानी की जा रही है। मनमर्जी से कार्य किए जा रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि नगर पालिका में सभासदों का कोई महत्व नहीं है। मांग की है कि नगर पालिका की मनमानी व अनियमितताओं पर रोक लगाए जाए और जनता के विकास कार्यों को कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। साथ ही बताया कि सात अगस्त को बहुमत से कमेटियों का गठन बोर्ड द्वारा किया गया था। जिसके क्रियान्वयन पर अध्यक्ष ने रोक लगा दी थी। जिसकी शिकायत मंडलायुक्त को सभासदों से की गई थी, जिसकी जांच एडीएम द्वारा कराई गई। जांच आख्या तीन माह में भी मंडलायुक्त के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई। नगर पालिका में विकास कार्यों में मनमानी की जा रही है। विकास में कार्यों में पारदर्शिता व गति लाने के लिए जांच आख्या मंडलायुक्त के समक्ष शीघ्र भेजने के लिए निर्देशित करने व अधिशासी अधिकारी नगर पालिका को समितियों के क्रियान्वयन कराने के लिए निर्देशित किया जाए। ज्ञापन देने के दौरान सभासद रामवती, कृष्ण कुमार पंथ, कुंजलता, रामबाबू यादव, अफजुल रहमान, हरिओम, मंजू, मोदी पंकज जैन, रजनी अहिरवार, शिवानी पाठक, नाजिया रजा, गीता, अनुराग जैन, जगभान कुशवाहा आदि के हस्ताक्षर बने हैं।
वहीं इस बारे में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी निहालचंद्र ने बताया कि परिषद की बोर्ड बैठक चार दिसंबर को आयोजित थी, लेकिन नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा स्थगित कर दी गई। इससे बैठक नहीं हो पाई है।