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जिला अस्पताल के चार डॉक्टर संक्रमित, इकलौते फिजीशियन के सहारे मरीज

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ललितपुर। बीमारी की हालत में दूरदराज के इलाकों से आने वाले मरीजों को जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। अस्पताल में तीन फिजीशियन सहित चार डॉक्टरों के संक्रमित होने से मरीजों की जिम्मेदारी एक फिजीशियन पर आ गई है। मरीजों की भीड़ बढ़ने पर जब ओपीडी के चिकित्सक भी नहीं मिलने से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई मरीज ओपीडी खुली होने पर चिकित्सक के आने की उम्मीद में बैठे रहते लेकिन ओपीडी का समय समाप्त होने पर बिना इलाज के मायूस होकर लौट जाते हैं। अस्पताल में हो रही लापरवाही का खामियाजा से मरीजों को उठाना पड़ा। यही कारण रहा कि नेत्र रोगियों की संख्या घटकर 50 फीसदी रह गई है।
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जनपद में अब तक न तो कोई बड़े नर्सिंग होम खुले हैं और न ही मेडिकल जैसी सुविधाएं मिल पाई हैं। ऐसे में समूची आबादी के इलाज की आस जिला अस्पताल हैं। यहां पर एक रुपये के पर्चा पर सभी प्रकार के मर्ज के उपचार की सुविधा मिलती है। इससे अस्पताल में अधिक भीड़ भाड़ बनी रहती है, लेकिन अब जिला अस्पताल प्रबंधन की लचर व्यवस्थाओं की भेंट चढ़ रहा है।
चार चिकित्सकों के संक्रमित हैं। नेत्र सर्जन चिकित्सक के संक्रमित होने से आंख के मरीजों को समस्या हो गई है। यहां चिकित्सक की मौजूदगी में 80 मरीज पहुंचे थे, जो अब आधे हो गए हैं। इन मरीजों को जांच व प्राथमिक उपचार की सुुविधा मिल रही है। वहीं जिला अस्पताल में तैनात चार फिजीशियन में तीन चिकित्सक कोविड पॉजिटिव हो गए हैं। इससे अब इकलौते फिजीशियन के सहारे जिला अस्पताल चल रहा है। अधिक भीड़ होने सभी मरीजों को उपचार तक मुहैया नहीं हो पा रहा है। मरीजों की अधिक भीड़ जुट रही है। कई मरीजों की जांच आने के पहले ही ओपीडी का समय समाप्त हो रहा है। जांच मिलने के बाद दूसरे दिन चिकित्सक के पास आना पड़ रहा है। वहीं कई मरीज बिना इलाज के वापस हो रहे हैं।
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चिकित्सक बरत रहे लापरवाही
जिला अस्पताल में चिकित्सक की उपेक्षा से मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। ऐसा ही नजारा शनिवार को जिला अस्पताल में देखने केे मिला। यहां पर आयुष चिकित्सक डॉ. श्यामसुंदर साहू की ओपीडी पर ताला लटका मिला। चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश सेठ की ओपीडी बंद थी, यहां इमरजेंसी ड्यूटी का बोर्ड लगा मिला। सर्जन डॉ. विशाल जैन व ईएनटी सर्जन डॉ. एम के गुप्ता की ओपीडी खुली थी, यहां लगभग 15 से अधिक मरीज बैठकर चिकित्सक का इंतजार कर रहे थे। वहीं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष कुमार, आर्थोसर्जन डॉ. एमसी गुप्ता ओपीडी में नहीं थे। ओपीडी में केवल होम्योपैथ ओपीडी, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीबी सिंह और वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आरपी सिंह उपचार करते नजर आए। अन्य ओपीडी में मरीज चिकित्सक का इंतजार करते रहे, कई बिना इलाज के ही वापस हो गए।
जांचों में आई 25 फीसदी कमी
जिला अस्पताल में चार चिकित्सकों के संक्रमित होने से मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। इसका अंदाजा पैथोलॉजी की जांचों में आई कमी से लगाया जा सकता है। जहां कतार लगी रहती थी, अब मरीजों की संख्या में कमी आई है। विभागीय आंकड़ों की माने तो अब तक एक दिन में लगभग 1100 से अधिक जांच होती थी। अब बीते चार दिनों से लगातार जांच में कमी आई है। शनिवार को पैथोलॉजी में 898 जांच हुईं है। इससे मरीजों के उपचार की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
अस्पताल में चार चिकित्सक संक्रमित हो गए हैं। इससे मरीजों को उपचार में कुछ समस्या हो गई है। चिकित्सकों को होम आइसोलेशन पूर्ण होने पर सेवाएं सुचारु रूप से मुहैया कराई जाएंगी। - डॉ. राजेंद्र प्रसाद, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल पुरुष
कान में दर्द होने पर इलाज को आया हूं, लेकिन दो घंटे इंतजार के बाद भी चिकित्सक नहीं आए हैं। इसकी वजह से काफी परेशानी हो रही है। अब प्राइवेट में ही दिखाना पड़ेगा। - पवन कुमार
हाथ में दर्द से आर्थोसर्जन से उपचार कराने के लिए आया था। अब तक चिकित्सक नहीं आए हैं। इंतजार करते-करते परेशान हो गए। मजबूरी में प्राइवेट डॉक्टर को दिखाएंगे। - सुनील
आर्थोसर्जन चिकित्सक के पास इलाज को आए थे, लेकिन जानकारी नहीं हो रही कि आएंगे या नहीं। दिखाने के लिए काफी मरीज बैठे हैं लेकिन कोई बताने वाला नहीं है। नितिन
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