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दस लक्षण धर्म का पालन करने से होती है आत्मशुद्धि : मुनि

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महरौनी। मुनि गुरुदत्त सागर ने कहा कि दस लक्षण पर्व जैन धर्म के दस मूल सिद्धांतों का पालन करने का उत्सव है। इसके माध्यम से आत्मा की शुद्धि और आध्यात्मिक विकास होता है। वह सोमवार को श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
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मुनिश्री ने कहा कि अनुयायी आत्म चिंतन, ध्यान, तपस्या और त्याग के माध्यम से मोक्ष मार्ग की साधना करते हैं और उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग, आकिंचन और ब्रह्मचर्य जैसे दस धर्मों का पालन कर आत्मा को पवित्र एवं शुद्ध बनाने का पुरुषार्थ करते हैं। मुनि मेघदत्त सागर ने कहा कि यह महापर्व आत्मचिंतन और आत्मनिरीक्षण का पर्व है, जो मनुष्य को अपनी गलतियों का पश्चाताप करने एवं दूसरों व स्वयं से क्षमा मांगने की प्रेरणा देता है। इस दौरान क्रोध, अहंकार, लोभ और मोह जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों का त्याग कर करुणा, क्षमा और आत्मसंयम को अपनाने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और मोक्ष मार्ग का द्वार खुलता है। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन मौजूद रहे।
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दस लक्षण महापर्व 28 से प्रारंभ
मुनि गुरु दत्त सागर एवं मुनि मेघदत्त सागर महाराज के सानिध्य में 28 अगस्त से ऋषि पंचमी पर दस लक्षण महापर्व का शुभारंभ होगा। इस अवसर पर श्रावक-श्राविकाओं द्वारा दस दिनों तक प्रतिदिन अभिषेक, शांति धारा, पूजन, स्वाध्याय, ध्यान, व्रत एवं उपवास आदि धार्मिक अनुष्ठानों आदि में भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
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